गोल्ड मार्केट में बड़ी गिरावट के बाद अब राहत की खबर है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का मानना है कि सोने की कीमतें अब अपने निचले स्तर (Floor) के करीब हैं। अक्टूबर में **6.3%** की गिरावट के साथ सोना **$3,913** प्रति औंस पर आ गया था, लेकिन रिकवरी के लिए अभी कुछ और शर्तों का पूरा होना बाकी है।
बाजार में सुधार के संकेत
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के लेटेस्ट एनालिसिस के मुताबिक, सोने में आई हालिया गिरावट के बाद अब बाजार एक 'इंटरिम बॉटम' (Interim bottom) की ओर बढ़ रहा है। अक्टूबर 2026 में सोने की कीमतों में 6.3% की तेज गिरावट देखी गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा स्थिति साल 2011 के बाद आई बड़ी गिरावट से काफी अलग है।
रिकवरी के लिए तीन शर्तें
WGC ने सोने की चाल को समझने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया है, जिसके आधार पर ही तेजी की पुष्टि होगी:
- टेक्निकल डिसलोकेशन: सोना फिलहाल अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज से करीब 10% नीचे ट्रेड कर रहा है, जो इसे 'ओवरसोल्ड' कैटेगरी में लाता है।
- US डॉलर की मजबूती: डॉलर की मजबूती फिलहाल बरकरार है, जो गोल्ड के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
- स्पेक्युलेटिव पोजीशनिंग का कम होना: यह सबसे जरूरी शर्त है। बाजार में मौजूद सट्टेबाजी और भारी लेवरेज (Leverage) का निकलना अभी बाकी है। जब तक यह 'वॉशआउट' नहीं होगा, तब तक एक टिकाऊ रिकवरी मुश्किल है।
निवेशकों के लिए सलाह
गोल्ड में कोई फिक्स्ड इंटरेस्ट या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए यह बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों के प्रति बेहद संवेदनशील है। जब यील्ड ज्यादा होती है, तो निवेशक सुरक्षित आय वाले एसेट्स की तरफ भागते हैं, जिसका असर सोने पर पड़ता है। काउंसिल के अनुसार, निवेशकों को बिल्कुल निचले स्तर को पकड़ने की कोशिश करने के बजाय 'ग्रेजुअल एक्यूमुलेशन' (Gradual accumulation) यानी धीरे-धीरे निवेश करने पर फोकस करना चाहिए।
आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने के लिए सेंट्रल बैंकों की मॉनेटरी पॉलिसी और फ्यूचर्स मार्केट में सट्टा पोजीशनिंग के डेटा पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
