World Gold Council (WGC) ने भारत सरकार से सोना (Gold) को एक 'Strategic Mineral' का दर्जा देने की मांग की है। इसका मकसद माइनिंग (खनन) की मंजूरी को आसान बनाना और देश के भारी-भरकम गोल्ड इम्पोर्ट (आयात) पर निर्भरता को कम करना है।
क्या है World Gold Council (WGC) की मांग?
World Gold Council (WGC) ने भारतीय सरकार से सोने को रणनीतिक खनिज (Strategic Mineral) का दर्जा देने का आग्रह किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर सोने के खनन (Mining) को बढ़ावा देना और भारत की सोने के आयात (Import) पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। WGC का मानना है कि यह दर्जा मिलने से माइनिंग कंपनियों के लिए नियामक माहौल आसान होगा, जो फिलहाल कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों से मंजूरी लेने की जटिल प्रक्रिया से जूझ रही हैं।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस से क्या होगा?
WGC इंडिया के CEO सचिन जैन के अनुसार, मौजूदा नियम माइनिंग के लिए बड़ी बाधा हैं। यदि सोने को 'Strategic Mineral' घोषित किया जाता है, तो यह सिंगल-विंडो क्लीयरेंस (Single-Window Clearance) की सुविधा देगा। इसका मतलब है कि माइनिंग कंपनियां सीधे केंद्र सरकार से जरूरी परमिट हासिल कर सकेंगी, जिससे प्रोजेक्ट में देरी और प्रशासनिक दिक्कतें काफी कम हो जाएंगी। निवेशकों के लिए, यह सोने की खोज और खनन में लगी कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने और रिटर्न ऑन कैपिटल (Return on Capital) को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
अर्थव्यवस्था और व्यापार संतुलन पर असर
भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, और भारी आयात के कारण अक्सर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) पर दबाव पड़ता है। WGC का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाना दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। 'स्वर्णिम उड़ान 2047' नामक रिपोर्ट में, WGC ने 2047 तक देश की सालाना सोने की मांग का 10% से 15% घरेलू खनन से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, WGC ने भारतीय परिवारों के पास रखे अनुमानित 31,000 टन सोने के मुद्रीकरण (Monetization) की क्षमता पर भी प्रकाश डाला है। इन संपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाकर, WGC का सुझाव है कि आयात की मांग का एक बड़ा हिस्सा घरेलू आपूर्ति से पूरा किया जा सकता है।
रणनीतिक महत्व और जोखिम
हालांकि इस प्रस्ताव का लक्ष्य व्यापार संतुलन को सुधारना है, लेकिन सरकारी नीतियों, पर्यावरण की मंजूरी और घरेलू माइनिंग साइट्स की व्यवहार्यता पर इसकी सफलता निर्भर करेगी। ऐतिहासिक रूप से, भारत में खनिज अन्वेषण (Mineral Exploration) को भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण नियमों के कारण महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। निवेशक इस प्रस्ताव पर सरकारी चर्चाओं पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि नियमों को आसान बनाने का कोई भी कदम घरेलू माइनिंग सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा। इसके अलावा, चूंकि वैश्विक केंद्रीय बैंक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के खिलाफ बचाव के रूप में सोना जमा कर रहे हैं, धातु का रणनीतिक महत्व उच्च बना हुआ है। आगे की महत्वपूर्ण बात यह होगी कि क्या खान मंत्रालय (Ministry of Mines) इस वर्गीकरण अनुरोध पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देता है और माइनिंग पॉलिसी में कोई बदलाव करता है।
