सोने को 'स्ट्रैटेजिक मिनरल' का दर्जा मिले: World Gold Council की सरकार से बड़ी मांग

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AuthorNeha Patil|Published at:
सोने को 'स्ट्रैटेजिक मिनरल' का दर्जा मिले: World Gold Council की सरकार से बड़ी मांग

World Gold Council (WGC) ने भारत सरकार से सोने को 'स्ट्रैटेजिक मिनरल' घोषित करने की मांग की है। 'स्वर्णिम उड़ान 2047' रोडमैप में WGC ने कहा है कि इससे माइनिंग अप्रूवल आसान होंगे और सोने के इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता कम होगी। रोडमैप में देश के घरेलू गोल्ड रिजर्व को मोनेटाइज करने की योजना भी बताई गई है।

'स्वर्णिम उड़ान 2047' रोडमैप में WGC की सिफारिशें

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने भारत के गोल्ड सेक्टर को बदलने के लिए 'स्वर्णिम उड़ान 2047' नाम से एक विजन डॉक्यूमेंट पेश किया है। 4 अगस्त 2026 को जारी इस रिपोर्ट में WGC ने एक बड़े नीतिगत बदलाव की वकालत की है: सोने को 'माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट' के तहत 'स्ट्रैटेजिक मिनरल' का दर्जा दिया जाए। काउंसिल का कहना है कि यह कदम भारत की सोने के भारी इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करने के लिए ज़रूरी है, जो अक्सर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट को प्रभावित करता है।

माइनिंग में आसानी और इंपोर्ट पर निर्भरता कम

फिलहाल, भारत में गोल्ड माइनिंग कई जटिल रेगुलेटरी बाधाओं से जूझ रही है, जिसमें मल्टी-स्टेट अप्रूवल शामिल हैं जो प्रोजेक्ट्स में सालों की देरी कर सकते हैं। WGC का तर्क है कि अगर सोने को स्ट्रैटेजिक मिनरल का दर्जा मिलता है, तो सरकार सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू कर सकती है। इससे माइनिंग कंपनियों को मौजूदा लालफीताशाही से बचने में मदद मिलेगी और घरेलू स्तर पर सोने की खोज और खनन को बढ़ावा मिलेगा। इस रोडमैप का लक्ष्य 2047 तक भारत की सालाना सोने की मांग का 10% से 15% घरेलू माइनिंग से पूरा करना है।

घरेलू गोल्ड रिजर्व का मोनेटाइजेशन

माइनिंग के अलावा, यह रोडमैप देश में मौजूद विशाल गोल्ड रिजर्व को भी संबोधित करता है। WGC के अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास लगभग 31,000 टन सोना है। यह एक बड़ी संपत्ति है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा निष्क्रिय पड़ा है। WGC के प्रस्ताव में इस घरेलू सोने का 10% से 15% हिस्सा फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम में लाने की योजना शामिल है। इसके लिए नेशनल गोल्ड बोर्ड और गोल्ड इनोवेशन सेंटर की स्थापना का सुझाव दिया गया है। लक्ष्य इस मोनेटाइजेशन प्रक्रिया को डिजिटाइज और सरल बनाना है, ताकि नागरिक आसानी से इसमें भाग ले सकें।

चुनौतियां और आगे का रास्ता

हालांकि, इन लक्ष्यों को हासिल करना आसान नहीं है। घरेलू माइनिंग प्रोजेक्ट्स में बहुत लंबा लीड टाइम होता है, और पर्यावरण और भूमि अधिग्रहण की मंजूरी पाना अभी भी एक मुश्किल प्रक्रिया है, भले ही इसे 'स्ट्रैटेजिक' टैग मिल जाए। इसके अलावा, भारतीयों के सोने के साथ जुड़ने के तरीके को बदलना एक संवेदनशील मुद्दा है। कई लोगों के लिए, सोना सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक पारंपरिक और भावनात्मक संपत्ति है। इसलिए, मोनेटाइजेशन प्रयासों में उच्च स्तर के भरोसे और सरल, पारदर्शी तकनीक की आवश्यकता होगी। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि रोडमैप स्ट्रक्चरल बदलावों पर केंद्रित है, लेकिन सोने का बाजार खुद ग्लोबल प्राइस वोलेटिलिटी, जियोपॉलिटिकल शिफ्ट्स और सेंट्रल बैंक की खरीद पैटर्न से प्रभावित होता है।

आगे क्या?

इस सेक्टर के लिए अगली महत्वपूर्ण चीज़ें सरकार की इन नीतिगत सिफारिशों पर प्रतिक्रिया होगी, खासकर माइनिंग कानूनों में किसी भी संभावित संशोधन और प्रस्तावित संस्थानों जैसे नेशनल गोल्ड बोर्ड के गठन पर। बाज़ार के जानकार माइनिंग एक्सप्लोरेशन नीतियों पर भी अपडेट की उम्मीद करेंगे, क्योंकि सरकार अपने दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.