Gold Price: Jefferies के Christopher Wood का तूफानी अनुमान! सोने का भाव ₹10,000 के पार जाएगा?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold Price: Jefferies के Christopher Wood का तूफानी अनुमान! सोने का भाव ₹10,000 के पार जाएगा?
Overview

Jefferies के दिग्गज एनालिस्ट Christopher Wood ने सोने (Gold) के भाव को लेकर एक ऐसा अनुमान लगाया है जो बाकियों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने सोने के लिए **$10,000** प्रति औंस का टारगेट सेट किया है, जो मौजूदा स्तरों से कहीं ज्यादा है।

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वैल्यूएशन में बड़ा अंतर: Wood का सोने पर 'आसमान छूता' टारगेट

Christopher Wood का $10,000 प्रति औंस का अनुमान सोने के भाव को लेकर एक बेहद बुलिश (bullish) नजरिया दिखाता है, जो मौजूदा मार्केट प्राइस और दूसरे बड़े फाइनेंशियल संस्थानों के कंसेंसस (consensus) से काफी अलग है। मार्च 2026 तक सोना लगभग $5,378.84 प्रति औंस के आसपास था। Wood का $6,000 से $6,500 का टारगेट रेंज, जिसमें $10,000 तक जाने की संभावना बताई गई है, ऐतिहासिक तुलनाओं पर आधारित है। उन्होंने 1980 के दशक में अमेरिकी डिस्पोजेबल इनकम (disposable income) के मुकाबले सोने की पीक वैल्यू को आधार बनाया है। यह सोने के वैल्यूएशन में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।

बाकियों से तुलना: तेजी तो है, पर इतनी नहीं!

हालांकि Wood का अनुमान बहुत एक्सट्रीम (extreme) है, दूसरे प्रमुख एनालिस्ट्स भी सोने को लेकर बुलिश हैं, लेकिन उनके फोरकास्ट (forecast) कहीं ज्यादा टेम्पर्ड (tempered) हैं। J.P. Morgan 2026 के अंत तक सोने का भाव $6,300 तक पहुंचने की उम्मीद कर रहा है, Deutsche Bank $6,000 का टारगेट दोहरा रहा है, और UBS $6,200 का अनुमान लगा रहा है। Goldman Sachs का व्यू $5,400 पर ज्यादा कंजरवेटिव (conservative) है, जबकि ANZ दूसरी तिमाही तक $5,800 का अनुमान दे रहा है। MKS PAMP के Nicky Shiels भी अक्टूबर 2026 तक $6,750 के टारगेट के साथ Wood के सबसे एग्रेसिव (aggressive) अनुमानों से काफी पीछे हैं। यह अंतर दिखाता है कि Wood का $10,000 का आंकड़ा एक आउटलायर (outlier) है और यह मार्केट की उम्मीदों के स्पेकुलेटिव (speculative) छोर पर है।

मैक्रो फैक्टर्स: सोने की मजबूती की नींव

मौजूदा मैक्रो इकोनॉमिक (macroeconomic) माहौल सोने की अपील के लिए उपजाऊ जमीन तैयार कर रहा है। लगातार बनी हुई इन्फ्लेशन (inflation), जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) और डी-डॉलरराइजेशन (de-dollarization) की तरफ बढ़ता रुझान सोने की सेफ-हेवन एसेट (safe-haven asset) और इन्फ्लेशन हेज (inflation hedge) के तौर पर मांग बढ़ा रहा है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक बड़े खरीदार रहे हैं, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। ऑयल प्राइस (oil price), अमेरिकी डॉलर की मजबूती और इंटरेस्ट रेट पॉलिसी (interest rate policy) जैसे फैक्टर्स सोने की दिशा को प्रभावित करते हैं। अमेरिकी डॉलर का नरम पड़ना और फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता सोने के आकर्षण को और बढ़ा रही है।

ऐतिहासिक संदर्भ: समानताएं और अंतर

ऐतिहासिक रूप से, सोना आर्थिक अनिश्चितता, फाइनेंशियल क्राइसिस (financial crises) और जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल के समय में एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है। इसने अक्सर स्टॉक और बॉन्ड जैसे पारंपरिक एसेट्स को पीछे छोड़ा है। हालांकि, ऐतिहासिक डेटा यह भी दिखाता है कि पैराबोलिक रैली (parabolic rallies) के बाद बड़ी करेक्शन्स (corrections) भी आ सकती हैं। उदाहरण के लिए, जनवरी 2026 में $5,600 प्रति औंस के हाई (high) को छूने के बाद सोने में भारी गिरावट आई थी, जो तेज उछाल के बाद बड़े ड्रॉडाउन (drawdowns) की संभावना को दर्शाता है।

कमोडिटी की तुलना: क्या सोने की अपील अनोखी है?

Wood लॉन्ग-टर्म एलोकेशन (allocation) के लिए सिल्वर, एनर्जी और कॉपर की तुलना में सोने को प्राथमिकता देते हैं। जहां सोने की सेफ-हेवन एसेट के रूप में भूमिका स्थापित है, वहीं दूसरी कमोडिटीज की अपनी अलग वैल्यू है। सिल्वर, जो एक इंडस्ट्रियल (industrial) और कीमती धातु दोनों है, ने हाल ही में अच्छा प्रदर्शन किया है। कॉपर इलेक्ट्रिफिकेशन (electrification) और AI इंफ्रास्ट्रक्चर (AI infrastructure) की मांग से जुड़ रहा है। ऑयल प्राइस माइनिंग लागत को प्रभावित करते हैं, लेकिन सप्लाई डायनामिक्स (supply dynamics) और जियोपॉलिटिकल प्रेशर (geopolitical pressures) के अधीन हैं। यह बताता है कि सोने की हेजिंग प्रॉपर्टीज (hedging properties) में Wood का विश्वास दूसरे सेक्टर्स के संभावित अपसाइड (upside) से कहीं ज्यादा है।

संभावित गिरावट का विश्लेषण: Wood के बड़े विजन में जोखिम

बुलिश मैक्रो बैकड्रॉप (macro backdrop) के बावजूद, Wood के $10,000 के टारगेट कीmagnitude (magnitude) और फिजिबिलिटी (feasibility) पर सवाल उठते हैं। इतनी बड़ी बढ़ोतरी के लिए सस्टेन्ड (sustained) और एक्सट्रीम कंडीशंस (extreme conditions) की ज़रूरत होगी, जैसे कि एक गंभीर और लम्बी इकोनॉमिक क्राइसिस (economic crisis) या फिएट करेंसी (fiat currencies) में कॉन्फिडेंस (confidence) का पूरी तरह कोलैप्स (collapse)। 2026 की शुरुआत में हुई आक्रामक रैली को ऑप्शन्स पोजिशनिंग (options positioning) ने मैकेनिकली एम्प्लीफाइड (mechanically amplified) किया था, जिससे एक शार्प अनवाइंड (sharp unwind) हुआ और यह दिखाया कि स्पेकुलेटिव एक्सेस (speculative excesses) कैसे रैपिड रिवर्सल (rapid reversals) को जन्म दे सकते हैं। इसके अलावा, AI-संबंधित टेक्नोलॉजीज (AI-related technologies) ने ऐतिहासिक रूप से एक्सपोनेन्शियली हायर रिटर्न्स (exponentially higher returns) दिए हैं, हालांकि इसमें वोलेटिलिटी (volatility) और रिस्क (risk) ज्यादा है। टैक्टिकल प्रॉफिट-टेकिंग (tactical profit-taking) का जोखिम, जिसे Wood ने खुद स्वीकार किया है, कीमतों में बड़ी गिरावट ला सकता है। एक मजबूत अमेरिकी डॉलर या जियोपॉलिटिकल टेंशन में कमी भी इस एक्सट्रीम अपवर्ड ट्रैजेक्टरी (upward trajectory) को डेरेल (derail) कर सकती है।

भविष्य का अनुमान: लगातार डिमांड, अनिश्चित शिखर

आगे चलकर, सेंट्रल बैंकों और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (institutional investors) से मिलने वाली स्ट्रक्चरल डिमांड (structural demand) सोने की कीमतों को सपोर्ट करती रहेगी। ये 'स्टिकी पोजिशन्स' (sticky positions) ट्रांजिएंट इवेंट्स (transient events) के बजाय फंडामेंटल मैक्रो रिस्क (macro risks) से जुड़ी हैं। जबकि मार्केट और भी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, वोलेटिलिटी का खतरा बना हुआ है, खासकर 2026 की शुरुआत में देखी गई तेज करेक्शन्स को देखते हुए। एनालिस्ट्स के टारगेट में अंतर बताता है कि जहां कंसेंसस (consensus) ऊंची कीमतों की ओर इशारा कर रहा है, वहीं Wood का एक्सट्रीम अपसाइड (upside) एक लो-प्रोबेबिलिटी, हाई-इम्पैक्ट सिनेरियो (low-probability, high-impact scenario) है। आने वाले समय में स्ट्रक्चरल डिमांड ड्राइवर्स (demand drivers) और मार्केट करेक्शन्स (market corrections) के बीच एक बैलेंसिंग एक्ट (balancing act) देखने को मिल सकता है, जो चेंजिंग सेंटीमेंट (changing sentiment) या इकोनॉमिक डेटा (economic data) से प्रेरित हो सकते हैं।

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