बेंगलुरु स्थित प्राइवेट कंपनी White Gold ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹1,343 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। पुरानी गोल्ड रीसाइक्लिंग मार्केट में कंपनी का संगठित मॉडल तेजी से अपनी जगह बना रहा है।
बाजार में धाक जमा रही White Gold
बेंगलुरु की इस कंपनी ने अपने संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग मॉडल के दम पर जबरदस्त बढ़त हासिल की है। कंपनी ने पूरे दक्षिण भारत में 150 से ज्यादा ब्रांचों का नेटवर्क खड़ा कर लिया है। हालांकि White Gold अभी एक प्राइवेट कंपनी है और शेयर बाजार (NSE/BSE) में लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसकी ग्रोथ गोल्ड रीसाइक्लिंग सेक्टर में आ रहे बदलाव को साफ दर्शाती है।
कैसे बदल रहा है गोल्ड का कारोबार?
पारंपरिक सुनारों के मुकाबले, White Gold ने टेस्टिंग में ट्रांसपेरेंसी और MCX स्पॉट रेट्स के साथ कीमत तय करने का तरीका अपनाया है। कंपनी अब स्पेक्ट्रोस्कोपिक टेस्टिंग का इस्तेमाल करती है, जिससे ग्राहकों को तुरंत लिक्विडिटी और उनके सोने की सही वैल्यू मिलती है।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
कंपनी का टारगेट फाइनेंशियल ईयर 2027 तक ₹3,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का है। बिजनेस मॉडल के तहत, खरीदे गए सोने को प्रोसेस करके थोक बाजार (Wholesale Trade) में भेज दिया जाता है। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Volatility), इन्वेंट्री की सुरक्षा और फर्जी सोने की पहचान जैसे जोखिम इस सेक्टर के बड़े चैलेंज बने हुए हैं। आने वाले समय में कंपनी के लिए अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सरकारी नियमों का पालन करना सबसे अहम होगा।
