West Asia में जारी तनाव के कारण ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका असर कीमतों पर दिख रहा है, जहां खजूर और किशमिश की इम्पोर्ट कॉस्ट **20%** से ज्यादा बढ़ गई है, जिससे दिवाली के सीजन में महंगाई बढ़ने का खतरा है।
सप्लाई चेन में बड़ी बाधाएं
West Asia में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत में त्योहारी ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई लाइन को ब्लॉक कर दिया है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच हुए डेटा को देखें तो किशमिश की इम्पोर्ट वैल्यू $3.2 से बढ़कर $3.8 प्रति किलो हो गई है, यानी इसमें 20.4% का इजाफा हुआ है। वहीं, खजूर की कीमतों में 23.5% की उछाल आई है, जो $0.6 से बढ़कर $0.8 प्रति किलो पहुंच गई हैं। ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले माल पर फ्रेट चार्ज और लंबे शिपिंग रूट का सीधा असर पड़ रहा है।
रिटेल महंगाई का बढ़ता दबाव
यह महंगाई अब आम आदमी की थाली तक पहुंच चुकी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खजूर की रिटेल इन्फ्लेशन जनवरी में 5.4% थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 8% हो गई है। अन्य ड्राई फ्रूट्स और नट्स की स्थिति और भी खराब है, जहां महंगाई दर 7% से उछलकर 9.1% पर पहुंच गई है। काजू की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है।
दिवाली के बजट पर असर
आमतौर पर दिवाली से पहले कीमतों में 1.6% से 3% तक का उछाल आता है, लेकिन इस साल 2% की बढ़ोतरी काफी चिंताजनक मानी जा रही है। इसका सीधा असर रिटेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा। अब व्यापारियों के सामने चुनौती है कि वे बढ़ी हुई लागत को खुद झेलें या ग्राहकों पर बोझ डालें।
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स को अब शिपिंग और फ्रेट कॉस्ट पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। साथ ही, रिटेल कंपनियों के Q3 नतीजे यह बताएंगे कि क्या वे इस इन्फ्लेशन को झेलने में सक्षम हैं या फिर उनकी इन्वेंट्री और मुनाफे पर गहरा असर पड़ा है।
