वेस्ट एशिया में जारी तनाव के चलते भारतीय चाय एक्सपोर्टर्स के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। शिपिंग रूट बाधित होने और लॉजिस्टिक्स खर्च में भारी उछाल के कारण अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में एक्सपोर्ट वॉल्यूम में **17.5%** की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने भारतीय चाय एक्सपोर्टर्स के सामने लॉजिस्टिक्स की गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अस्थिरता के कारण जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि पोर्ट पर भीड़ भी बढ़ गई है। इसका सीधा असर कंपनियों के खर्चों पर पड़ रहा है, जिसमें इमरजेंसी फ्यूल सरचार्ज, बंकर फ्यूल की बढ़ती कीमतें और वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम शामिल हैं।
आंकड़ों की मार
वित्तीय प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में एक्सपोर्ट वॉल्यूम 17.5% गिर गया है। हालांकि कोच्चि ऑक्शन में चाय की औसत कीमत ₹188 प्रति किलो के आसपास स्थिर बनी हुई है, लेकिन यह बढ़ती शिपिंग लागत को कवर करने के लिए नाकाफी है। लंबी शिपिंग के कारण कंपनियों का वर्किंग कैपिटल भी फंसा हुआ है, क्योंकि खाड़ी देशों के आयातकों से पेमेंट मिलने में देरी हो रही है।
नई राहों की तलाश
इन चुनौतियों से निपटने के लिए Tea Board of India अब खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए रूस, चीन, अफ्रीका और कनाडा जैसे नए बाजारों में एक्सपोर्ट बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि भारत में कुल उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा घरेलू स्तर पर ही खप जाता है, जिससे कंपनियों को एक बड़ा सुरक्षा कवच (Buffer) मिलता है। हालांकि, जो कंपनियां पूरी तरह एक्सपोर्ट पर निर्भर हैं, उनके लिए मार्जिन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनियां बढ़ती लागत को ग्राहकों पर कितना डाल पाती हैं और नए बाजारों में कितनी तेजी से पैठ बना पाती हैं।
