ग्लोबल राइस मार्केट में हलचल तेज है। वियतनाम का 5% ब्रोकन राइस **$470-$480** प्रति टन तक पहुंच गया है, जो 2025 की शुरुआत के बाद से सबसे महंगा है। वहीं, भारत में कीमतें **$387-$392** प्रति टन के आसपास स्थिर बनी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय सप्लाई की ओर रुख कर रहे हैं।
वियतनाम की समस्या, भारत को फायदा
वियतनाम में घरेलू सप्लाई में कमी और ऑटम-विंटर हार्वेस्ट से जुड़ी चिंताओं के कारण चावल की कीमतें जनवरी 2025 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। इस हफ्ते वियतनाम में 5% ब्रोकन राइस का भाव $470 से $480 प्रति मीट्रिक टन के बीच ट्रेड कर रहा है।
इसके विपरीत, भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए एक 'बफर' की तरह काम कर रहा है। भारत का 5% ब्रोकन पारबॉइल्ड राइस $387 से $392 प्रति टन पर कोट किया जा रहा है। उत्तर भारतीय राज्यों में नई धान की फसल आने से घरेलू स्टॉक मजबूत है, जो अगले महीने मध्य और दक्षिण भारत में भी बना रहेगा।
ग्लोबल मार्केट की स्थिति
थाईलैंड में भी कीमतें $480 प्रति टन पर मजबूती से बनी हुई हैं, जहां उत्पादन लागत और करेंसी उतार-चढ़ाव का बड़ा असर है। वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले भारतीय चावल के सस्ते होने के कारण अब अफ्रीकी इम्पोर्टर्स ने अपनी खरीदारी का केंद्र भारत को बना लिया है।
रिस्क फैक्टर्स (Emerging Risks)
बाजार के जानकारों की नजर अब आने वाले समय पर है, क्योंकि:
- El Nino: अगले साल चावल उत्पादन चक्र पर इसके असर की आशंका है, जिससे भविष्य की पैदावार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
- लोकल चुनौतियां: थाईलैंड में बाढ़ ने लॉजिस्टिक्स बिगाड़ दिए हैं, जिससे सप्लाई साइड पर दबाव है।
- महंगाई का असर: बांग्लादेश जैसे देशों में स्टॉक पर्याप्त होने के बावजूद, एनर्जी और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण रिटेल कंज्यूमर पर दबाव बरकरार है।
आने वाले महीनों में चावल की ग्लोबल सप्लाई भारतीय निर्यात पर बहुत हद तक निर्भर करेगी, जो यह तय करेगी कि अंतर्राष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए भारतीय बाजार कितना तैयार है।
