वेदांता ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 6 जुलाई को 9% तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पहली तिमाही में तेल और गैस उत्पादन में सालाना आधार पर 17% की कमी के बाद आई है। हालांकि, आयरन और स्टील के वॉल्यूम में 4% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन निवेशकों का ध्यान ऊर्जा सेगमेंट में कम उत्पादन पर है। कंपनी अब भविष्य में एक्सप्लोरेशन की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए आउटसोर्सिंग मॉडल अपना रही है।
वेदांता के शेयरों पर दबाव क्यों?
6 जुलाई को वेदांता ग्रुप के शेयरों में लगातार दूसरे दिन बिकवाली देखने को मिली, जिससे शेयर 9% तक गिर गए। यह गिरावट कंपनी के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के प्रोडक्शन अपडेट के बाद आई है, जिसमें विभिन्न बिजनेस सेगमेंट्स में मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं।
तेल और गैस उत्पादन में बड़ी गिरावट
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा डिवीजन से आई है। वेदांता ऑयल एंड गैस ने बताया कि औसत डेली ग्रॉस प्रोडक्शन में सालाना आधार पर 17% की कमी आई है। उत्पादन घटकर 77.7 हजार बैरल ऑफ ऑयल इक्विवेलेंट प्रति दिन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 93.2 हजार बैरल था। कुल तेल और गैस वॉल्यूम में भी 17% की गिरावट आई, जो पिछले साल 8.5 हजार बैरल प्रति दिन से घटकर 7.1 हजार बैरल प्रति दिन रह गया। राजस्थान ब्लॉक कंपनी की उत्पादन और कैश फ्लो का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
आयरन और स्टील में दिखी तेजी
इसके विपरीत, आयरन और स्टील ऑपरेशंस में अलग तस्वीर दिखी। सालेबल आयरन ओर प्रोडक्शन 4% बढ़कर 2.6 मिलियन ड्राई मीट्रिक टन हो गया। गोवा और ओडिशा में उत्पादन बढ़ने से यह ग्रोथ संभव हुई, हालांकि कर्नाटक क्षेत्र में उत्पादन में 46% की भारी गिरावट आई। इसी तरह, कुल सालेबल स्टील प्रोडक्शन में 4% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के 562 किलोटन की तुलना में 582 किलोटन रहा।
कंपनी का नया प्लान
एफिशिएंसी और वॉल्यूम ग्रोथ को बढ़ाने के लिए, वेदांता ऑयल एंड गैस एक एंड-टू-एंड आउटसोर्सिंग मॉडल की ओर बढ़ रही है। कंपनी का इरादा एक्सप्लोरेशन और डेवलपमेंट को मैनेज करने के लिए ग्लोबल टेक्निकल एक्सपर्ट्स के साथ सहयोग करना है, ताकि लागत और उत्पादन को ऑप्टिमाइज़ किया जा सके। आर्थिक रूप से, कंपनी के पास ICRA AA+ (Stable) का क्रेडिट रेटिंग है, जो रेटिंग एजेंसी की ओर से वित्तीय स्थिरता का संकेत देता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आगे चलकर निवेशकों को नई आउटसोर्सिंग रणनीति की सफलता पर नजर रखनी होगी, जिससे ऊर्जा सेगमेंट में उत्पादन की गिरावट को रोका जा सके। साथ ही, कर्नाटक में आयरन ओर के उत्पादन में आई कमी को कंपनी कैसे मैनेज करती है, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा। बाजार यह भी देखेगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री इन प्रोडक्शन ट्रेंड्स का आने वाले तिमाही नतीजों पर कितना असर डालती है।
