Vedanta Resources ने FY27 की पहली तिमाही में अपने नेट कर्ज को **$1.1 अरब डॉलर** कम कर दिया है, जिससे कुल कर्ज **$9.4 अरब डॉलर** पर आ गया है। बेहतर ऑपरेशनल परफॉरमेंस और रिफाइनेंसिंग की वजह से फाइनेंस कॉस्ट में **31%** की कमी आई है।
Vedanta Resources के लिए अच्छी खबर!
Vedanta Resources ने FY27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जो कंपनी के लिए एक बड़ी राहत लेकर आए हैं। कंपनी ने अपने नेट कर्ज में $1.1 अरब डॉलर की ज़बरदस्त कटौती की है, जिससे कुल नेट कर्ज अब $9.4 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। यह कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और ब्याज के बोझ को कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस में उछाल
कंपनी के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस का बड़ा हाथ है। FY27 की पहली तिमाही में, Vedanta Limited ने अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में 98% का उछाल दर्ज किया है, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 152% की बढ़ोतरी हुई है। इस बेहतर प्रदर्शन और कम हुए कुल कर्ज के चलते, कंपनी का नेट डेट-टू-ऑपरेटिंग प्रॉफिट रेशियो 1.2x पर आ गया है, जो मार्च 2025 के 2.0x की तुलना में काफी बेहतर स्थिति दर्शाता है।
प्रमोटर के शेयर से हटी गिरवी!
निवेशकों के लिए एक और बड़ी खबर यह है कि प्रमोटर ग्रुप की Vedanta Limited में गिरवी रखी सभी इक्विटी शेयर्स से गिरवी हटा दी गई है। यह 7 अगस्त 2026 को कर्ज की एक निश्चित राशि की पूरी चुकौती के बाद संपन्न हुआ। शेयर बाज़ार में, प्रमोटर द्वारा गिरवी रखे शेयरों को छुड़ाना एक सकारात्मक संकेत माना जाता है, जो कंपनी में जोखिम कम होने का इशारा देता है।
सस्ता हुआ कर्ज!
खर्चों को और नियंत्रित करने के लिए, Vedanta Aluminium ने नए फंड जुटाने की योजना बनाई है। यह यूनिट बैंक लोन के ज़रिए लगभग ₹13,500 करोड़ जुटा रही है, जिसकी ब्याज दरें 7.9% से 8% के बीच रहेंगी। महंगे कर्ज को सस्ते कर्ज से बदलने की इस रणनीति ने फाइनेंस कॉस्ट में 31% की कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
मैनेजमेंट ने FY27 के लिए ग्रुप ऑपरेटिंग प्रॉफिट का लक्ष्य करीब $10 अरब डॉलर रखा है और इस साल ₹20,000 करोड़ से अधिक का कर्ज घटाने की योजना है। हालांकि, निवेशकों को कमोडिटी सेक्टर के स्वाभाविक जोखिमों से सावधान रहना चाहिए। जिंक, कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुओं की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, माइनिंग व्यवसाय में रेगुलेटरी बाधाएं और प्रोजेक्ट में देरी जैसे ऑपरेशनल जोखिम भी शामिल हैं।
