यह डीमर्जर 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा, और उम्मीद है कि नई 5 कंपनियां अप्रैल 1 से मई 15, 2026 के बीच स्टॉक मार्केट में लिस्ट हो जाएंगी। शेयरहोल्डर्स को Vedanta Ltd. के हर शेयर के बदले नई बनी हर कंपनी का एक-एक शेयर मिलेगा।
इस कदम से निवेशकों में काफी उत्साह है, जिसका असर पिछले एक साल में स्टॉक की कीमत में 67% की बढ़ोतरी के रूप में देखा गया है। एनालिस्ट्स भी इस कदम को लेकर काफी पॉजिटिव हैं और 'मॉडरेट बाय' की रेटिंग देते हुए ₹735.50 का टारगेट प्राइस दे रहे हैं, जो कि 13% से ज्यादा की तेजी का संकेत है। Nuvama जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने तो ₹806 का टारगेट सेट किया है, जो डीमर्जर से वैल्यू क्रिएशन और 2025-2028 के बीच 17-24% के अनुमानित EBITDA ग्रोथ की उम्मीदें दर्शाता है।
मौजूदा समय में, भारत का मेटल्स और माइनिंग सेक्टर काफी तेजी से बढ़ रहा है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और एनर्जी ट्रांजिशन जैसी पहलों से प्रेरित है। ऐसे में Vedanta के ऑपरेशन्स को भी इस ग्रोथ का फायदा मिल रहा है। खासकर, ग्लोबल सिल्वर की कीमतों में आई करीब 125% (डॉलर टर्म्स में) की भारी उछाल Vedanta के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है, क्योंकि कंपनी की हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी है। Vedanta का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹2.54 ट्रिलियन है और इसका पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) करीब 19.5x है। यह वैल्यूएशन पीयर्स जैसे Hindalco Industries (12.8x P/E) और Oil India (14.0x P/E) के दायरे में है, जबकि Steel Authority of India (25.6x) और JSW Steel (39.9x) इससे महंगे ट्रेड कर रहे हैं।
इन सबके बावजूद, कुछ बड़ी चिंताएं बनी हुई हैं। मार्च 2025 तक Vedanta का कंसोलिडेटेड डेट (Consolidated Debt) लगभग ₹75,186 करोड़ था, जो कंपनी की एक बड़ी कमजोरी है। हालांकि डीमर्जर से कर्ज कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन यह कर्ज नई बनी कंपनियों के बीच बंट जाएगा, जो उनकी व्यक्तिगत ग्रोथ या फ्लेक्सिबिलिटी को सीमित कर सकता है। सबसे गंभीर बात यह है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वित्तीय जोखिमों, हाइड्रोकार्बन एसेट्स की गलत जानकारी देने और देनदारियों (Liabilities) के अपर्याप्त डिस्क्लोजर पर आपत्तियां जताई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि रेगुलेटरी बाधाएं आ सकती हैं और पारदर्शिता की कमी हो सकती है। पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों को मैनेज करना भी एक बड़ी एग्जीक्यूशन चुनौती होगी। यदि एक यूनिट खराब प्रदर्शन करती है, तो इसका असर दूसरों पर भी पड़ सकता है।
कंपनी का मैनेजमेंट इस डीमर्जर को लेकर दृढ़ है और इसे 'वेदांता 2.0' के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानता है। उनका लक्ष्य क्रिटिकल मिनरल्स और एनर्जी सेक्टर में लीडरशिप हासिल करना है। प्रबंधन का मानना है कि 'प्योर-प्ले' स्ट्रक्चर स्पेशलाइज्ड निवेशकों को आकर्षित करेगा और कॉर्पोरेट ढांचे को सरल बनाएगा। 1 अप्रैल, 2026 की प्रभावी तारीख नजदीक आते ही, बाजार की नजरें हर नई यूनिट की ऑपरेशनल इंडिपेंडेंस और वित्तीय प्रदर्शन पर होंगी। निवेशकों को कर्ज का बंटवारा, कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान्स, और प्रत्येक यूनिट की मार्केट डायनामिक्स को मैनेज करने की क्षमता का बारीकी से विश्लेषण करना होगा, खासकर पेट्रोलियम मंत्रालय की डिस्क्लोजर संबंधी चिंताओं को देखते हुए।