Vedanta और JSW Steel के शेयरों में आज साफ अंतर देखने को मिला। Vedanta Ltd. के शेयर 5% से ज्यादा चढ़े, वहीं JSW Steel Ltd. 2% की मामूली बढ़त पर रुक गया। इस बड़ी तेजी-मंदी की मुख्य वजहें हैं Vedanta के डी-मर्जर (Demerger) की उम्मीदें और एल्युमीनियम, सिल्वर जैसी कमोडिटी की कीमतों में आई तेजी, जिस पर अलग-अलग ब्रोकरेज हाउसेस (Brokerage Houses) की राय भी बंटी हुई है।
वैल्यूएशन और कैटेलिस्ट में बड़ा अंतर
ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Citi ने तो Vedanta को 'Overweight' रेटिंग दी है, जबकि JSW Steel को 'Underweight' करार दिया है। Citi का मानना है कि JSW Steel का वैल्यूएशन (Valuation) मौजूदा स्टील कीमतों के हिसाब से बहुत ज्यादा है। कंपनी लगभग 9 गुना EV/EBITDA पर ट्रेड कर रही है, जो कि स्टील की मौजूदा कीमतों से ज्यादा उम्मीदें दिखाता है। Citi के मुताबिक, स्टील की कीमतें इम्पोर्ट पैरिटी (Import Parity) के करीब हैं, ऐसे में JSW Steel में ज्यादा तेजी की गुंजाइश कम है। इसके विपरीत, Citi को Vedanta में डी-मर्जर के कारण 15% तक का अपसाइड दिख रहा है। Vedanta का EV/EBITDA 5.5 गुना है, जो एल्युमीनियम (Aluminum) के $3,070, जिंक (Zinc) के $3,325 और सिल्वर (Silver) के $88 जैसे मौजूदा कमोडिटी दामों के साथ सही बैठता है।
BofA की बुलिश कॉल से Vedanta को सहारा
इस बीच, BofA Securities ने Vedanta पर अपना रुख और मजबूत किया है। उन्होंने शेयर को 'Neutral' से 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस को 75% बढ़ाकर ₹840 कर दिया है, जो पहले ₹480 था। BofA एल्युमीनियम की कीमतों में मजबूती, सिल्वर के सपोर्टिव दाम और लगभग 6% के शानदार डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) को लेकर काफी बुलिश (Bullish) है। साथ ही, Vedanta की पेरेंट कंपनी का डेट (Debt) कम होना भी एक पॉजिटिव फैक्टर है, जिससे इंटर-कॉर्पोरेट लोन पर ब्रांड-फी की चिंता कम हुई है।
एनालिस्ट्स का भरोसा और सेक्टर का हाल
कुल मिलाकर, Vedanta को एनालिस्ट्स (Analysts) का तगड़ा सपोर्ट मिल रहा है। 15 एनालिस्ट्स में से 11 इसे 'Buy' करने की सलाह दे रहे हैं, जबकि 4 'Hold' की राय रखते हैं। JSW Steel पर भी एनालिस्ट्स पॉजिटिव हैं, जिनका एवरेज टारगेट प्राइस लगभग ₹1,219.79 है, हालांकि CLSA ने हाल ही में इसे 'Underperform' से 'Hold' किया है और टारगेट ₹1,200 रखा है।
वैल्यूएशन के मामले में Vedanta का TTM P/E रेश्यो लगभग 16.41x है, जबकि JSW Steel का P/E रेश्यो 47.50x के पार है। भारतीय मेटल्स और माइनिंग सेक्टर 2026 में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है, लेकिन स्टील सेक्टर 2025 में थोड़ी नरमी के बाद 2026 में रफ्तार पकड़ सकता है।
जोखिम और भविष्य की राह
हालांकि, दोनों कंपनियों के लिए कुछ जोखिम भी हैं। JSW Steel के लिए सबसे बड़ी चिंता इसकी वैल्यूएशन और स्टील कीमतों का टिकाऊपन है। सेक्टर में लगातार नई क्षमताएं जुड़ रही हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव आ सकता है। Vedanta के डी-मर्जर की राह में भी कुछ मुश्किलें हैं, जैसे रेगुलेटरी अड़चनें और कुछ कंपनियों (जैसे Malco Energy) के लिक्विडेशन का रिस्क। डी-मर्जर मार्च 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक करना है।
Vedanta का डी-मर्जर एल्युमीनियम, ऑयल एंड गैस, और मेटल्स जैसे सेक्टर्स में अलग-अलग कंपनियां बनाएगा। JSW Steel के लिए, Citi के मुताबिक फिलहाल अपसाइड सीमित हो सकता है, लेकिन CLSA की 'Hold' रेटिंग स्टील की बढ़ती कीमतों को देखते हुए एक संतुलित नजरिया दिखाती है। कुल मिलाकर, भारतीय मेटल्स और माइनिंग सेक्टर 2026 में अच्छी ग्रोथ दिखा सकता है।