Vedanta Aluminium Metal Ltd ने जून तिमाही में **₹6,597 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में **3 गुना** ज्यादा है। कंपनी ने **₹8** प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है। यह Vedanta Group से अलग होने के बाद कंपनी की पहली स्वतंत्र लिस्टिंग के नतीजों के बाद आया है।
Vedanta Aluminium की शानदार पहली तिमाही
Vedanta Aluminium Metal Ltd (VAML) ने वितीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए दमदार नतीजे पेश किए हैं। यह कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, क्योंकि यह Vedanta Group से अलग होकर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने के बाद कंपनी की पहली कमाई रिपोर्ट है। कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹6,597 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹2,162 करोड़ था। इस तरह कंपनी के मुनाफे में 3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू में 45.9% का इजाफा हुआ और यह ₹21,393 करोड़ तक पहुंच गया।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस और डिविडेंड का ऐलान
कंपनी ने इस शानदार ग्रोथ का श्रेय बेहतर प्रोडक्शन वॉल्यूम और एल्यूमीनियम की कीमतों में हुए सुधार को दिया है। इस मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के दम पर, कंपनी के बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष के लिए ₹8 प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। इस डिविडेंड के जरिए कंपनी लगभग ₹3,128.55 करोड़ का भुगतान करेगी। यह फैसला पैरेंट Vedanta एंटिटी से अलग होने के बाद कंपनी की कैश फ्लो पोजीशन के मैनेजमेंट के आकलन को दर्शाता है।
स्ट्रैटेजिक फोकस और रिन्यूएबल एनर्जी
CEO राजेश कुमार के नेतृत्व में मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और वैल्यू-एडेड एल्यूमीनियम प्रोडक्ट्स के उत्पादन पर फोकस कर रही है ताकि ग्लोबल जियोपॉलिटिकल रिस्क से निपटा जा सके। इस स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी में बड़ा निवेश करना है। कंपनी ने Serentica Renewable India के साथ 150 MW की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को लागू करने के लिए एक समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद मौजूदा सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट को राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स में बदलना है। Vedanta Aluminium इस रिन्यूएबल प्रोजेक्ट में 26% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए ₹165 करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है, जो कंपनी के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
चूंकि यह कंपनी की स्वतंत्र लिस्टेड एंटिटी के तौर पर पहली तिमाही है, निवेशक यह ट्रैक करेंगे कि कमोडिटी-ड्रिवेन सेक्टर में कंपनी अपने मार्जिन को कैसे बनाए रखती है। एल्यूमीनियम की कीमतें ग्लोबल डिमांड और कच्चे माल की लागत के प्रति संवेदनशील होती हैं, जो भविष्य की तिमाहियों में मुनाफे को प्रभावित कर सकती हैं। निवेशक नए रिन्यूएबल एनर्जी एसेट्स के इंटीग्रेशन और इन सस्टेनेबिलिटी प्रोजेक्ट्स पर कैपिटल स्पेंडिंग का कंपनी के डेट लेवल और फ्री कैश फ्लो पर आने वाले तिमाहियों में क्या असर होगा, इस पर भी नज़र रखेंगे। कंपनी की हाई प्रोडक्शन वॉल्यूम बनाए रखने और कच्चे माल की लागत का प्रबंधन करने की क्षमता उसके वित्तीय प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
