UTI गोल्ड ETF ने अपने कैटेगरी में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसने पिछले 3 सालों में **34%** का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है। हालांकि, यह लंबी अवधि के लिए लीड कर रहा है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छोटे समय (1-3 महीने) में रैंकिंग बदल सकती है।
UTI गोल्ड ETF का दमदार प्रदर्शन
गोल्ड एक्सचेंज-Traded Fund (ETF) सेगमेंट में UTI गोल्ड ETF ने अपने साथियों को पीछे छोड़ दिया है। 7 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इसने 34.0% का तीन साल का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। इस प्रदर्शन के साथ, यह ICICI Prudential गोल्ड ETF और Aditya Birla Sun Life गोल्ड ETF से थोड़ा आगे निकल गया है, जिन्होंने इसी अवधि में 33.7% का रिटर्न दिया है।
बेंचमार्क को दी मात
फंड का यह लंबी अवधि का प्रदर्शन अपने बेंचमार्क की तुलना में काफी प्रभावशाली है। तीन साल की अवधि में, UTI गोल्ड ETF ने अपने बेंचमार्क को 32.3 प्रतिशत अंकों से पीछे छोड़ दिया, जबकि बेंचमार्क ने केवल 1.7% का रिटर्न दिया। एक साल की अवधि में भी यह अंतर काफी रहा, जहां ETF ने 48.0% का रिटर्न दिया, वहीं बेंचमार्क 10.1% पर रहा।
छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव
जहाँ फंड लंबी अवधि में लगातार रिटर्न दिखा रहा है, वहीं छोटी अवधि के प्रदर्शन में कहानी कुछ और है। बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि Mirae Asset गोल्ड ETF ने हाल ही में एक महीने और तीन महीने के प्रदर्शन में बढ़त हासिल की है, क्रमशः -6.6% और -2.4% के रिटर्न के साथ। यह दिखाता है कि गोल्ड ETF वैश्विक बुलियन मार्केट के रुझानों और करेंसी के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं और इनमें छोटी अवधि में अस्थिरता (volatility) देखने को मिल सकती है।
AUM और लिक्विडिटी
निवेशक अक्सर फंड के आकार और लिक्विडिटी का आकलन करने के लिए Assets Under Management (AUM) को देखते हैं। इस कैटेगरी के टॉप पांच फंडों में, ICICI Prudential गोल्ड ETF का AUM सबसे बड़ा है, जो लगभग ₹27,578.2 करोड़ है। बड़ा AUM कभी-कभी बेहतर लिक्विडिटी प्रदान कर सकता है, हालांकि यह जरूरी नहीं कि छोटे फंडों की तुलना में बेहतर रिटर्न की गारंटी हो।
निवेशक किन बातों पर ध्यान दें?
गोल्ड ETF का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों का मुख्य लक्ष्य फिजिकल गोल्ड की घरेलू कीमत को यथासंभव बारीकी से ट्रैक करना होता है। Tracking error – ETF के प्रदर्शन और गोल्ड प्राइस इंडेक्स के बीच का अंतर – एक महत्वपूर्ण मेट्रिक है। उच्च ट्रैकिंग त्रुटि से गोल्ड की वास्तविक कीमत की तुलना में कम रिटर्न मिल सकता है। इसके अतिरिक्त, निवेशकों को Expense ratio पर भी विचार करना चाहिए, जो फंड हाउस द्वारा लिया जाने वाला वार्षिक शुल्क है। इन शुल्कों में मामूली अंतर भी लंबी अवधि के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। इन फंडों का भविष्य का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय गोल्ड की कीमतों, USD-INR विनिमय दर और प्रत्येक फंड मैनेजर द्वारा अपने विशिष्ट बेंचमार्क के मुकाबले ट्रैकिंग त्रुटि को कितनी कुशलता से कम किया जाता है, इस पर निर्भर करेगा।
