Gem & Jewellery Export: अमेरिका का बड़ा फैसला! भारतीय ज्वेलरी पर टला 100% टैक्स का खतरा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Gem & Jewellery Export: अमेरिका का बड़ा फैसला! भारतीय ज्वेलरी पर टला 100% टैक्स का खतरा

अमेरिकी सरकार ने भारतीय जेम्स और ज्वेलरी पर प्रस्तावित **100%** दंडात्मक ड्यूटी को हटा लिया है, जिससे एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिली है। वहीं, घरेलू बाजार में लोग पारंपरिक गहनों के बजाय गोल्ड बार और ETF की ओर रुख कर रहे हैं।

एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी राहत

भारतीय जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स के लिए राहत की बड़ी खबर है। अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय सामानों पर प्रस्तावित 100% की भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी को वापस ले लिया है। सितंबर से मंडरा रहे रेगुलेटरी अनिश्चितता के बादल अब छंट चुके हैं, जिससे कंपनियां आने वाले क्रिसमस सीजन के लिए अपनी सप्लाई चेन को सुचारू रूप से शुरू कर सकेंगी।

अमेरिका भारतीय ज्वेलरी का सबसे बड़ा बाजार है। इस राहत से सेक्टर में नई ऊर्जा आई है, जिसने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में 13% की एक्सपोर्ट ग्रोथ दर्ज की है।

घरेलू बाजार में बदल रहा ट्रेंड

एक्सपोर्ट मोर्चे पर जहां अच्छी खबर है, वहीं घरेलू स्तर पर उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव दिख रहा है। पिछले एक महीने में सोने की कीमतों में 5% की गिरावट आई है और यह सोमवार को ₹145,944 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है।

रिटेलर्स के लिए क्या है जोखिम?

फाइनेंशियल एनालिस्ट्स का मानना है कि भारतीय परिवारों की सोने को देखने की नजरिया बदल गई है। अब लोग गहनों के बजाय गोल्ड बार, सिक्के और ETF में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि लोग खपत के बजाय लिक्विड वेल्थ यानी निवेश पर ध्यान दे रहे हैं।

निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग पॉइंट है। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो पारंपरिक ज्वेलरी रिटेलर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उनका कारोबार अक्सर महंगे गहनों (value-added jewellery) से होने वाले मुनाफे पर निर्भर करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.