US और Iran के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल मार्केट में हलचल है। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जबकि महंगाई और ब्याज दरों के डर के बीच गोल्ड की चाल पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य तनातनी ने एनर्जी मार्केट को हिला कर रख दिया है। US और Iran के बीच नए तनाव के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर सीधे तौर पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के दाम 0.6% बढ़कर $91.05 प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं, वहीं WTI क्रूड (West Texas Intermediate) में 1% का उछाल देखा गया और यह $86.59 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। लराक आइलैंड (Larak Island) पर हुए हमलों के बाद स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने का डर ट्रेडर्स के बीच बना हुआ है।
गोल्ड और फेडरल रिजर्व का रुख
गोल्ड की कीमतें $4,445 प्रति औंस के आसपास स्थिर नजर आ रही हैं, जो पिछले दो दिनों में आई 3.5% की गिरावट के बाद एक राहत भरी खबर है। हालांकि, फेडरल रिजर्व का सख्त रुख निवेशकों को डरा रहा है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) ने संकेत दिए हैं कि महंगाई अभी भी काबू में नहीं है। बाजार में अब यह उम्मीद बढ़ गई है कि सितंबर 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसकी संभावना 60% से ऊपर बताई जा रही है।
महंगाई का गहराता संकट
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता एनर्जी की बढ़ती कीमतों और महंगाई के बीच का तालमेल है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो यह सीधे तौर पर आम जनता और बिजनेस की लागत बढ़ाएगा। अगर महंगाई बनी रही, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है। यह स्थिति गोल्ड जैसे एसेट क्लास के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों के माहौल में नॉन-यील्डिंग एसेट्स की डिमांड प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट की स्थिति और आने वाले इकोनॉमिक डेटा पर टिकी हैं।
