US-Iran जंग का कच्चे तेल पर असर: S&P Global ने घटाई डिमांड फोरकास्ट, कीमतें बढ़ेंगी?

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AuthorNeha Patil|Published at:
US-Iran जंग का कच्चे तेल पर असर: S&P Global ने घटाई डिमांड फोरकास्ट, कीमतें बढ़ेंगी?
Overview

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी ने कच्चे तेल (Crude Oil) की डिमांड पर बड़ा झटका दिया है। S&P Global Energy ने साल 2026 तक ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ के अनुमान को **7 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd)** तक घटा दिया है। कंसल्टेंसी का कहना है कि यह कदम फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में ऊर्जा सप्लाई में गंभीर रुकावटों के कारण उठाया गया है, जिससे बाजार में बड़ी अस्थिरता (volatility) और डिमांड डिस्ट्रक्शन (demand destruction) की आशंका है।

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अब कितनी होगी कच्चे तेल की मांग?

S&P Global Energy ने अपने 2026 के ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ के अनुमान को घटाकर मात्र 4 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) कर दिया है। यह पहले के अनुमानों से काफी कम है। इस बड़े बदलाव के बाद, कंसल्टेंसी अब मार्केट के अन्य जानकारों के करीब पहुंच गई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का भी मानना है कि मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते संघर्ष और इसके खपत पर पड़ने वाले असर के कारण 2026 में तेल की मांग में 80,000 bpd की गिरावट आ सकती है।

कुछ एनालिस्ट्स, जैसे J.P. Morgan, अब भी मानते हैं कि सप्लाई मांग से ज्यादा हो सकती है, लेकिन वे भू-राजनीतिक (geopolitical) जोखिमों को एक बड़ा फैक्टर मान रहे हैं। वहीं, Goldman Sachs ने 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का औसत दाम $56 और WTI का $52 रहने का अनुमान लगाया है, जो ओवरसप्लाई की स्थिति को दर्शाता है, लेकिन सप्लाई में रुकावटों को भी अहम जोखिम बताया है। S&P Global Ratings ने भी 2026 के लिए WTI और ब्रेंट क्रूड के प्राइस फोरकास्ट को $15 प्रति बैरल बढ़ा दिया है, जिसका मुख्य कारण लंबे समय तक सप्लाई में आने वाली रुकावटें हैं। मार्केट का आउटलुक अब मजबूत ग्रोथ से बदलकर सतर्कता की ओर बढ़ गया है।

जलडमरूमध्य होर्मुज (Strait of Hormuz) पर मंडराया खतरा

दुनिया के लिए तेल सप्लाई का एक अहम रास्ता, जलडमरूमध्य होर्मुज (Strait of Hormuz), अब दबाव में है। इस मार्ग में रुकावटों के कारण दुनिया की लगभग 40% रिफाइनिंग कैपेसिटी प्रभावित हो रही है। आमतौर पर, हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स इस रास्ते से गुजरते हैं। इसका सबसे बुरा असर रिफाइंड फ्यूल्स, जैसे जेट फ्यूल और डीजल पर दिख रहा है। कुछ इलाकों में जेट फ्यूल की कीमतें $195 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। डीजल और एलपीजी (LPG) मार्केट में भी कीमतों में भारी उछाल आया है। क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधे हमले और वैकल्पिक सप्लाई खोजने की मुश्किलों ने रिफाइनरी ऑपरेशन्स को बाधित किया है। इस स्थिति में, अमेरिकी रिफाइनर्स (U.S. refiners) को इसका सीधा फायदा मिल रहा है, क्योंकि वे उत्तर अमेरिकी क्रूड को कम दाम पर खरीदकर $20-$25 प्रति बैरल तक का मार्जिन कमा रहे हैं, जो सामान्य से लगभग दोगुना है।

रिजर्व (Reserves) और अमेरिकी एक्सपोर्ट्स से मिली थोड़ी राहत

बढ़ते संकट और सप्लाई की चिंताओं के जवाब में, बड़े उपभोक्ता देश अपनी स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व (strategic oil reserves) से तेल जारी कर रहे हैं। जापान ने अपने राष्ट्रीय और निजी स्टॉकपाइल्स से रिकॉर्ड 8 करोड़ बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है, जो उनके घरेलू मांग का 45 दिनों तक का कवर कर सकती है। दक्षिण कोरिया भी 2.246 करोड़ बैरल जारी कर रहा है। IEA सदस्य देशों द्वारा कुल 40 करोड़ बैरल जारी करने की योजना है, जिससे मार्केट को स्थिर करने में मदद मिलेगी। सप्लाई की तरफ, अमेरिकी क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट्स (U.S. crude oil exports) में तेज उछाल देखा गया है, जो अप्रैल 17 वाले हफ्ते में 50 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहा। यह सितंबर 2023 के बाद सबसे अधिक है। हालांकि, इन एक्सपोर्ट्स पर भी कुछ सीमाएं हैं।

ऐतिहासिक संकेत और आर्थिक असर

मध्य पूर्व में वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल 1970 और 1980 के दशक के तेल झटकों (oil shocks) की याद दिलाती है, जब ईरानी क्रांति और खाड़ी युद्ध (Gulf War) जैसे घटनाओं ने कीमतों में भारी वृद्धि और आर्थिक अस्थिरता पैदा की थी। IEA ने वर्तमान स्थिति को 'ग्लोबल ऑयल मार्केट के इतिहास में सबसे बड़ा सप्लाई डिसरप्शन' बताया है। इससे ग्लोबल इंफ्लेशन (inflation) बढ़ रहा है, जिसके चलते IMF ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ फोरकास्ट को घटाकर 3.1% कर दिया है। केंद्रीय बैंकों के सामने बढ़ती महंगाई और धीमी पड़ती आर्थिक ग्रोथ (stagflationary pressures) के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ब्याज दरें (interest rates) लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। मार्केट को ऊंची कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता के लंबे दौर की उम्मीद है।

फोरकास्ट के लिए मुख्य जोखिम

वर्तमान में सीजफायर (ceasefire) नाजुक है, जो किसी भी समय तनाव के फिर से बढ़ने का बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिकी नाकाबंदी को 'संघर्ष विराम का उल्लंघन' बताया है। अमेरिकी प्रोडक्शन पर निर्भरता, अमेरिकी रिफाइनिंग सिस्टम की जटिलताओं को नजरअंदाज करती है, जो घरेलू और आयातित दोनों क्रूड को प्रोसेस करता है। इससे पता चलता है कि अमेरिकी उत्पादन अकेले मध्य पूर्व के सप्लाई की जगह हमेशा नहीं ले सकता। लगातार ऊंची कीमतें डिमांड डिस्ट्रक्शन को बढ़ा सकती हैं, जिससे खपत में स्थायी कमी आ सकती है। जलडमरूमध्य होर्मुज की भेद्यता और संभावित रिफाइनरी नुकसान, मार्केट को सप्लाई शॉक के प्रति खुला छोड़ देता है।

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