अमेरिकी छूट (Waiver) का खत्म होना
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक महत्वपूर्ण छूट (waiver) को समाप्त कर दिया है, जो पहले भारत जैसे देशों को रूसी समुद्री तेल (Russian seaborne oil) खरीदने की इजाजत देती थी। यह फैसला रूस के खिलाफ अमेरिका की नीति में एक बड़ा बदलाव है, और इसका मकसद ग्लोबल तेल की सप्लाई को स्थिर करना और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना था।
सीनेटरों का दबाव
इस फैसले के पीछे डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शेहीन (Jeanne Shaheen) और एलिजाबेथ वारेन (Elizabeth Warren) का दबाव काम आया। उनका तर्क था कि छूट के बावजूद रूसी तेल खरीदने से मॉस्को को यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के लिए फंड मिल रहा था। उन्होंने यह भी चिंता जताई थी कि इस छूट से अमेरिकियों के लिए ईंधन की कीमतें कम नहीं हो रही थीं।
गैस की कीमतें अब भी ऊंची
ऊर्जा बाज़ार को स्थिर करने के अमेरिकी प्रशासन के प्रयासों के बावजूद, गैसोलीन (gasoline) की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। अमेरिकी नागरिक लगभग $4.50 प्रति गैलन का भुगतान कर रहे हैं, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। फरवरी के अंत से ग्लोबल तेल की कीमतें भी $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
भारत के लिए नई चुनौतियां
रूस की तेल पर लगी छूट (waiver) के खत्म होने के बाद भारत, जो हाल के महीनों में रूसी तेल का एक प्रमुख खरीदार बन गया था, अब एक मुश्किल स्थिति में आ गया है। नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा खरीद योजनाओं पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।