अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक औसत दाम **$5.85** प्रति गैलन तक पहुंच गए हैं। इसकी मुख्य वजह US-Iran के बीच जारी तनाव और रूस में रिफाइनरी का काम बाधित होना है, जिससे ग्लोबल महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिका में डीजल की रिटेल कीमतें लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। 4 सितंबर 2026 तक, औसत लागत $5.85 प्रति गैलन के करीब पहुंच गई है। यह उछाल ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आई तंगी का नतीजा है, जो पिछले 7 महीनों से जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता से उपजी है।
तनाव की असली जड़
बाजार में इस उठापटक का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है, अब असुरक्षित हो गया है। सैन्य टकराव के खतरे के चलते शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से दूरी बना ली है, जिससे टैंकरों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
सप्लाई पर दोहरी मार
मिडिल ईस्ट के अलावा, पूर्वी यूरोप में जारी संघर्ष ने ग्लोबल फ्यूल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। रूस की तेल रिफाइनरियों पर हो रहे हमलों ने डीजल और अन्य डिस्टिलेट्स के प्रोडक्शन को सीमित कर दिया है। इस दोहरी मार के कारण Brent क्रूड $95 से $96 प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है।
अमेरिका का कम होता रिजर्व
चिंता की एक बड़ी वजह अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है, जो 1982 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। पिछली बार बाजार को संभालने के लिए सरकार ने रिजर्व का काफी स्टॉक रिलीज कर दिया था, जिससे अब संकट के समय सरकार के पास बफर बहुत कम बचा है।
इकोनॉमी पर असर
डीजल का इस्तेमाल ट्रकिंग, शिपिंग और भारी औद्योगिक मशीनरी में होता है, इसलिए इसकी कीमतों का बढ़ना सीधे तौर पर आम जनता और बिजनेस पर टैक्स जैसा है। इकोनॉमिस्ट्स को डर है कि यह महंगाई सेंट्रल बैंक को लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने पर मजबूर कर सकती है, जिससे आर्थिक सुस्ती या 'हार्ड लैंडिंग' का खतरा पैदा हो गया है। अब निवेशकों की नजरें Persian Gulf में किसी भी तरह की शांति या ग्लोबल रिफाइनरी आउटपुट के अपडेट पर टिकी हैं।
