गोल्ड पर सेंट्रल बैंकों का यू-टर्न? तुर्की ने बेचे रिजर्व, बाकी देशों ने बढ़ाई खरीदारी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
गोल्ड पर सेंट्रल बैंकों का यू-टर्न? तुर्की ने बेचे रिजर्व, बाकी देशों ने बढ़ाई खरीदारी!
Overview

साल 2026 के मार्च महीने में सेंट्रल बैंकों की गोल्ड (Gold) को लेकर रणनीतियों में एक बड़ा बंटवारा देखने को मिला। एक तरफ तुर्की जैसे देश लिक्विडिटी (Liquidity) की जरूरतें पूरी करने और अपनी करेंसी को सहारा देने के लिए भारी मात्रा में गोल्ड बेच रहे थे, वहीं दूसरी ओर पोलैंड, चीन और उज्बेकिस्तान जैसे देश लॉन्ग-टर्म डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) और प्रोटेक्शन के लिए गोल्ड की खरीदारी जारी रखे हुए थे।

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ग्लोबल रिजर्व स्ट्रैटेजी में बड़ा अंतर

मार्च 2026 में ग्लोबल रिजर्व मैनेजमेंट (Global Reserve Management) में एक बड़ा अंतर साफ दिखाई दिया। कुछ सेंट्रल बैंकों ने तात्कालिक आर्थिक दबावों के बीच नकदी जुटाने के लिए सोने को बेचा, जबकि अन्य ने जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risk) से बचाव और लॉन्ग-टर्म डाइवर्सिफिकेशन के लिए भारी मात्रा में सोना खरीदना जारी रखा। यह सब गोल्ड की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच हुआ, जो विभिन्न वैश्विक संघर्षों और बड़े आर्थिक ट्रेंड्स से प्रभावित थी।

तुर्की ने बेचे रिजर्व, बाकी देशों ने की खरीदारी

इस दौरान, सेंट्रल बैंकों ने कुल 30 टन गोल्ड बेचा, जो फरवरी के मुकाबले एक बड़ा बदलाव था। तुर्की मुख्य सेलर रहा, जिसने अपनी फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) बढ़ाने और करेंसी डिफेंस (Currency Defence) के दौरान लिक्विडिटी की मांग को पूरा करने के लिए 60 टन गोल्ड बेचा। इन बिक्रियों में गोल्ड-फॉर-एफएक्स स्वैप (Gold-for-FX Swaps) शामिल थे, जो अस्थायी प्रकृति के संकेत देते हैं। रूस ने भी 6 टन गोल्ड बेचा। इसके विपरीत, कई सेंट्रल बैंकों ने अपने गोल्ड स्टॉकपाइल (Gold Stockpile) बढ़ाना जारी रखा। पोलैंड के नेशनल बैंक ने 11 टन गोल्ड खरीदा, और पहली तिमाही में 31 टन की खरीदारी की। यह पोलैंड की मल्टी-ईयर प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत वे 700 टन गोल्ड रखने का लक्ष्य रखते हैं। उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान ने भी क्रमशः 9 टन और 6 टन गोल्ड खरीदा। चीन के सेंट्रल बैंक ने 5 टन गोल्ड जोड़ा, जो लगातार 17वें महीने की खरीदारी थी। यह उनकी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो करेंसी स्विंग और जियोपॉलिटिकल रिस्क से बचाव के लिए है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने अपनी खरीदारी कम की, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण उसके गोल्ड होल्डिंग्स का मूल्य और फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में उसका हिस्सा बढ़कर 17.2% तक पहुंच गया।

गोल्ड की भूमिका: कीमत के उतार-चढ़ाव के बीच सेफ हेवन

गोल्ड की कीमतों में मार्च में एक 'जियोपॉलिटिकल पैराडॉक्स' (Geopolitical Paradox) देखने को मिला। मध्य-पूर्व के संघर्षों ने शुरुआत में कीमतों को $5,400 प्रति औंस से ऊपर धकेल दिया, लेकिन बाद में मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर्स (Macroeconomic Factors) जैसे कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की रेट एक्सपेक्टेशंस (Rate Expectations) में बदलाव के कारण कीमतें $4,100-$4,400 के दायरे में आ गईं। इन उतार-चढ़ावों के बावजूद, गोल्ड की एक स्ट्रेटेजिक रिजर्व एसेट (Strategic Reserve Asset) के तौर पर भूमिका मजबूत हो रही है। यह अब ग्लोबल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का 20% हिस्सा है, जो यूरो से ज्यादा और अमेरिकी डॉलर के बाद दूसरे स्थान पर है। सेंट्रल बैंक रणनीतिक तौर पर गोल्ड खरीद रहे हैं, न कि सिर्फ टैक्टिकल तौर पर, ताकि वे सिंगल करेंसी पर निर्भरता कम कर सकें और काउंटरपार्टी रिस्क (Counterparty Risk) वाले एसेट्स से बच सकें। उभरते बाजारों ने अपनी गोल्ड रिजर्व में काफी बढ़ोतरी की है, इसे सैंक्शन्स (Sanctions) और करेंसी डीवैल्यूएशन (Currency Devaluation) के खिलाफ हेज (Hedge) के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। अनुमान है कि सेंट्रल बैंक 2026 में 800-850 टन गोल्ड खरीद सकते हैं, जो कीमतों को सहारा दे सकता है।

जोखिम और संभावित मूल्य दबाव

हालांकि, गोल्ड के जमावड़े की इस प्रवृत्ति के बावजूद, कुछ जोखिम बने हुए हैं। तुर्की की बड़ी बिक्री दर्शाती है कि कैसे कमजोर अर्थव्यवस्थाएं, जो करेंसी और लिक्विडिटी संकट का सामना कर रही हैं, अपने बचाव के लिए गोल्ड का अंतिम हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं। नकदी की यह तत्काल जरूरत कीमतों पर अल्पकालिक दबाव बना सकती है, जैसा कि मार्च में देखा गया। 'जियोपॉलिटिकल पैराडॉक्स' ने यह भी दिखाया कि मैक्रोइकोनॉमिक ताकतें, जैसे डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतियां, सुरक्षित-आश्रय संपत्तियों (Safe-Haven Assets) की मांग पर अस्थायी रूप से हावी हो सकती हैं। जबकि सेंट्रल बैंकों की खरीदारी समर्थन दे रही है, उच्च ग्लोबल डेट और प्रमुख सेंट्रल बैंकों की टाइट मॉनेटरी पॉलिसी (Tight Monetary Policy) गोल्ड जैसी नॉन-इंटरेस्ट-बेयरिंग एसेट्स पर दबाव डाल सकती है। गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे देशों द्वारा और भी जबरन बिक्री की संभावना है, खासकर अगर जियोपॉलिटिकल संघर्ष आर्थिक झटकों को बढ़ाते हैं या सैंक्शन्स का विस्तार करते हैं।

आगे का नज़रिया: लगातार मांग की उम्मीद

विश्लेषकों को 2026 में गोल्ड की कीमतों में निरंतर समर्थन की उम्मीद है, जो सेंट्रल बैंकों की लगातार मांग, जियोपॉलिटिकल बदलावों और इंफ्लेशन प्रोटेक्शन (Inflation Protection) की जरूरत से प्रेरित होगा। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) और जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) जैसी संस्थाएं अनुमान लगाती हैं कि साल के अंत तक गोल्ड की कीमतें $5,400 से बढ़कर $6,000 प्रति औंस से अधिक हो सकती हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का अनुमान है कि सेंट्रल बैंकों द्वारा शुद्ध खरीदारी 800-850 टन के उच्च स्तर पर बनी रहेगी, जो गोल्ड की एक मुख्य स्ट्रेटेजिक एसेट के रूप में भूमिका की पुष्टि करता है।

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