कर्नाटक और महाराष्ट्र में मानसून की अनिश्चितता के कारण तुअर की कीमतों में तेजी का रुख है। त्योहारी सीजन की मांग और अफ्रीका से आयात में देरी ने सप्लाई को काफी सीमित कर दिया है, जिससे खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ रहा है।
बाजार की स्थिति और कीमतों का गणित
देश की प्रमुख मंडियों में तुअर दाल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। गुलबर्गा जैसी बड़ी मंडियों में तुअर का होलसेल भाव ₹8,500 से ₹9,400 प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गया है, जबकि प्रोसेस्ड तुअर दाल ₹12,000 प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गई है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले मिलर्स और ट्रेडर्स के बीच कम स्टॉक को लेकर मची होड़ ने कीमतों को और बढ़ा दिया है।
खराब मानसून का असर
आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ दलहन का रकबा 1.6% बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, लेकिन हकीकत कुछ और है। कर्नाटक और महाराष्ट्र में बारिश की कमी के कारण फसल की पैदावार प्रभावित हुई है। कई इलाकों में तो हालात इतने खराब हैं कि वहां सूखा घोषित करना पड़ा है, जिससे बाजार में सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इन्वेस्टर्स को इस स्थिति पर करीब से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि तुअर दाल देश की महंगाई (Inflation) की गणना का एक अहम हिस्सा है। अगर दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, FMCG और फूड प्रोसेसिंग कंपनियां, जिनके लिए यह रॉ मटेरियल है, उनके मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
सरकार का दखल संभव
बाजार को अब सरकारी हस्तक्षेप का डर है। सरकार के पास फिलहाल 10 लाख टन का तुअर बफर स्टॉक मौजूद है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार स्टॉक लिमिट लगाने या इंपोर्ट ड्यूटी कम करने जैसे कड़े कदम उठा सकती है। निवेशकों को सितंबर के अंत तक आने वाले अफ्रीकी इंपोर्ट और सरकार की नई गाइडलाइंस पर नजर रखनी चाहिए, जो आने वाली तिमाही में कीमतों की दिशा तय करेंगे।
