US-India ट्रेड डील बनी सोने की नई उड़ान की वजह
3 फरवरी 2026 को सोने की कीमतों में आई तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण US-India के बीच हुआ नया ट्रेड एग्रीमेंट रहा। इस समझौते के तहत, वाशिंगटन ने भारत से आने वाले सामानों पर आयात शुल्क (import tariffs) को 50% से घटाकर 18% कर दिया। इस कदम से भारत में सोने की मांग में अचानक भारी बढ़ोतरी देखी गई, जिसने घरेलू गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। MCX गोल्ड फ्यूचर्स (MCX Gold Futures) अप्रैल डिलीवरी के लिए लगभग 3% चढ़कर ₹1,48,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस टैरिफ कटौती के साथ, भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने और व्यापार बाधाओं को कम करने की खबरें भी सामने आई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे ट्रेड डील से भारत में निवेश (capital flows) बढ़ेगा और देश के आर्थिक विकास (GDP growth) में 7.4% तक की रफ्तार देखने को मिल सकती है, जिससे भारत एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर और मजबूत होगा।
अनिश्चितता के बीच 'सेफ-हेवन' की ओर भागे निवेशक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने की कीमतों ने जबरदस्त वापसी की। स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) करीब 4% उछलकर $4,837.16 प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स (US gold futures) 4.5% बढ़कर $4,859.30 प्रति औंस हो गया। इस ग्लोबल रैली की एक बड़ी वजह अमेरिकी सरकार के आंशिक शटडाउन (partial US government shutdown) के चलते आर्थिक आंकड़ों का अभाव रहा। ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेशक अक्सर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों (safe-haven assets) की ओर रुख करते हैं। इससे पहले, फेडरल रिजर्व के संभावित अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम ने भी डॉलर की मजबूती और CME मार्जिन में बढ़ोतरी के चलते कीमतों में उतार-चढ़ाव लाया था, लेकिन अब 'सेफ-हेवन' की मांग फिर से हावी हो गई है।
जानकारों की राय: वोलेटिलिटी जारी, पर आउटलुक पॉजिटिव
बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में यह उछाल भले ही तेज हो, लेकिन बाजार में वोलेटिलिटी (volatility) यानी उतार-चढ़ाव का दौर अभी जारी रह सकता है। एनरिच मनी (Enrich Money) के सीईओ, पोंमुडी आर. (Ponmudi R.) के अनुसार, MCX गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,38,000 से ₹1,48,000 के दायरे में कारोबार कर रहा है और इसने तेजी का स्ट्रक्चर (rising channel structure) बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि ₹1,43,000–₹1,45,000 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस (resistance) है, लेकिन अगर कीमतें ₹1,50,000 के ऊपर टिकती हैं, तो यह ₹1,65,000–₹1,70,000 तक जा सकती हैं, जो मध्यम अवधि के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। वहीं, UBS ने सोने के दाम आने वाले महीनों में $6,000 के पार जाने का अनुमान लगाया है, जबकि जेपी मॉर्गन (JPMorgan) का तो और भी बुलिश (bullish) अनुमान है कि 2026 के अंत तक यह $6,300 प्रति औंस तक पहुंच सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की दिलचस्पी के चलते सोने की कुल मांग 5,002 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, कुछ विश्लेषक 2026 के अंत तक कीमतें $4,600 के आसपास रहने का भी अनुमान लगा रहे हैं, जो बाजार में मिली-जुली राय को दर्शाता है।