भारत भर की मंडियों में टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भीषण गर्मी और पानी की कमी ने प्रोडक्शन पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे अब फूड इन्फ्लेशन बढ़ने और RBI के इंटरेस्ट रेट कट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
देश की प्रमुख मंडियों में टमाटर की कीमतें बेकाबू हो गई हैं। कोलार APMC यार्ड, जो टमाटर का एक बड़ा हब है, वहां भाव ₹800 प्रति क्विंटल से उछलकर ₹1,500 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। प्रीमियम क्वालिटी के टमाटर तो इससे भी महंगे बिक रहे हैं। इस तेजी के पीछे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खराब मौसम और सप्लाई में भारी कमी मुख्य वजह है।\n\n### El Niño का फसलों पर असर\n\nयह संकट सीधे तौर पर El Niño घटना से जुड़ा है। सितंबर में कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य 30 डिग्री के औसत से काफी ज्यादा है। ऊपर से मॉनसून की बारिश में 13% की कमी ने पानी का संकट बढ़ा दिया है। इसका नतीजा यह हुआ कि टमाटर की फसल में 'टोमेटो लीफ कर्ल वायरस' जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, जिससे पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई है।\n\n### इकोनॉमी के लिए खतरे की घंटी\n\nनिवेशकों और बाजार के लिए यह सिर्फ एक कमोडिटी का मामला नहीं है, बल्कि स्ट्रक्चरल फूड इन्फ्लेशन का संकेत है। जब खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो आम आदमी का बजट बिगड़ता है और खर्च करने की क्षमता कम हो जाती है। यह FMCG कंपनियों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे सेल्स वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है।\n\nइसके अलावा, यदि फूड इन्फ्लेशन लंबे समय तक हाई बनी रहती है, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाएगा। सेंट्रल बैंक महंगाई को देखते हुए ही मॉनिटरी पॉलिसी तय करता है। अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों और आम लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा बना रहेगा।\n\n### रूरल डिमांड पर भी असर\n\nग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिख सकता है। फसल खराब होने से किसानों की कुल कमाई कम हो रही है, जिससे ट्रैक्टर और फर्टिलाइजर जैसे कृषि इनपुट की मांग घट सकती है। साथ ही, देश भर में जलाशयों का स्तर सामान्य से कम होने के कारण आने वाले रबी सीजन की फसलों की सिंचाई को लेकर भी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
