Electrum Group के चेयरमैन थॉमस कपलान ने सोने की कीमतों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला अनुमान लगाया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में सोना **$50,000** प्रति औंस के स्तर को छू सकता है।
दिग्गज निवेशक और The Electrum Group के चेयरमैन थॉमस कपलान ने सोने को लेकर एक बेहद साहसी भविष्यवाणियां की है। कपलान के मुताबिक, सोना आने वाले समय में $30,000 से लेकर $50,000 प्रति औंस तक का सफर तय कर सकता है। उनका यह मानना है कि फिलहाल सोना एक लंबे और 'स्ट्रक्चरल बुल मार्केट' (Structural Bull Market) के बीच में है, जिसे ग्लोबल फिस्कल चुनौतियों और फिएट करेंसी की गिरती वैल्यू से ताकत मिल रही है।
इस तेजी के पीछे का लॉजिक
कपलान का कहना है कि सोना केंद्रीय बैंकों की नीतियों और सरकारी कर्ज के बढ़ते बोझ के खिलाफ सबसे बड़ा बचाव (Hedge) है। उनके विश्लेषण के अनुसार, सोने की कीमतों में हो रही वृद्धि कोई छोटी अवधि की हलचल नहीं है, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी में हो रहे फंडामेंटल बदलावों का नतीजा है। जैसे-जैसे सरकारें फिस्कल अस्थिरता से जूझेंगी, निवेशक अपनी संपत्ति बचाने के लिए सोने का रुख करेंगे, जिससे इसकी कीमत में तेजी आना तय है।
1987 के क्रैश से तुलना
बाजार में जारी उठा-पटक को लेकर कपलान ने 1987 के 'ब्लैक मंडे' स्टॉक मार्केट क्रैश का उदाहरण दिया है। उनका मानना है कि निवेशक अक्सर मार्केट में होने वाली छोटी गिरावटों को रिवर्सल समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में ये केवल अस्थायी झटके होते हैं। वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे रोज के उतार-चढ़ाव को देखने के बजाय सोने के लंबे सफर पर नजर रखें।
निवेशकों के लिए चेतावनी
भले ही यह अनुमान बहुत बड़ा है, लेकिन ध्यान रहे कि इसमें कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है। यह एक लॉन्ग-टर्म थ्योरी है जिसमें काफी जोखिम भी हैं। कपलान ने खुद पहले आगाह किया है कि आर्थिक संकट के समय सरकारें माइनिंग ऑपरेशंस में हस्तक्षेप कर सकती हैं, जिसे 'ज्यूरिसडिक्शनल रिस्क' कहते हैं। इसके अलावा, सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, यानी यह कोई डिविडेंड या ब्याज नहीं देता।
भारतीय निवेशकों के लिए, जो सोने को पारंपरिक तौर पर सुरक्षित निवेश मानते हैं, यह खबर पोर्टफोलियो में विविधता रखने की याद दिलाती है। इस सेक्टर में नजर रखने वाले लोगों को डेली प्राइस इंडेक्स के बजाय केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के रुझान और रियल इंटरेस्ट रेट्स पर नजर रखनी चाहिए।
