भारत में फॉरेन एक्सचेंज (Forex) की मांग अब सिर्फ अमेरिकी डॉलर तक सीमित नहीं रह गई है। थॉमस कुक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे शहरों (Tier 2 और 3) से कुल लेनदेन का **53%** हिस्सा आ रहा है। यह बदलते ट्रैवल ट्रेंड्स का संकेत है, हालांकि कंपनी की हालिया Q1 FY27 नतीजों में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों का असर भी दिखा है।
फॉरेक्स डिमांड में बड़ा बदलाव: डॉलर से डेस्टिनेशन करेंसी की ओर
भारतीय यात्री अब विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) के लिए अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। थॉमस कुक इंडिया की 'इंडिया फॉरेक्स रिपोर्ट 2026' के मुताबिक, यह बदलाव मुख्य रूप से थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम जैसे पड़ोसी देशों की शॉर्ट-हॉल (छोटी अवधि की) छुट्टियों के बढ़ते चलन के कारण हो रहा है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर अभी भी 49% मांग के साथ सबसे ज्यादा मांगा जाने वाला करेंसी है, लेकिन थाई बाथ, यूएई दिरहम और सिंगापुर डॉलर जैसी मुद्राओं का बढ़ता इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के नए और विविध गलियारों को दर्शाता है।
छोटे शहरों का दबदबा: 53% डिमांड अब इन शहरों से
फॉरेक्स सेक्टर में सबसे बड़ा बदलाव मांग के भौगोलिक फैलाव में देखा जा रहा है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों से कुल मांग का 53% हिस्सा आ रहा है, जो कि प्रमुख मेट्रो शहरों से आने वाले 47% की हिस्सेदारी से अधिक है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा की इच्छा और डिस्पोजेबल आय (Disposable Income) पारंपरिक कॉर्पोरेट केंद्रों से काफी आगे बढ़ रही है।
कस्टमर्स की बदलती आदतें: डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ी मांग
यात्री अब विदेशी मुद्रा खरीदने के तरीके भी बदल रहे हैं। अब ज्यादातर ग्राहक अपनी यात्रा से सिर्फ 4 से 7 दिन पहले ही नकदी या कार्ड खरीद रहे हैं, जबकि पहले यह अवधि 10 से 14 दिन हुआ करती थी। इस तेज साइकल ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने की गति बढ़ा दी है। वर्तमान में, कुल लेनदेन का 25% वेबसाइट्स, ऐप्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रहा है, जिसमें कंपनी ने डिजिटल सेल्फ-सर्विस के उपयोग में 50% की सालाना वृद्धि दर्ज की है।
चुनौतियों का सामना: भू-राजनीतिक तनावों का असर
जहां एक ओर ये रिपोर्ट उपभोक्ताओं के व्यवहार में सकारात्मक बदलावों की ओर इशारा करती है, वहीं थॉमस कुक इंडिया को परिचालन संबंधी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने FY27 की पहली तिमाही में 12% राजस्व (Revenue) में गिरावट और 21% मुनाफे (Profit) में कमी दर्ज की है। प्रबंधन ने इस प्रदर्शन का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल को बताया है, जिसने उस क्षेत्र की यात्रा की मांग को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
आगे की राह: ग्रोथ और अस्थिरता के बीच संतुलन
निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनी डिजिटल और टियर 2-3 सेगमेंट में अपनी ग्रोथ को ट्रैवल सर्विसेज बिजनेस की अस्थिरता के साथ कैसे संतुलित करती है। ऑपरेटिंग लागत (Operating Costs) अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है, और कंपनी का वित्तीय स्वास्थ्य क्षेत्रीय संघर्षों, वीजा प्रोसेसिंग समय और मुद्रा में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशील है। इस रणनीति की भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या अवकाश यात्रा और डिजिटल अपनाने में वृद्धि, भू-राजनीतिक अस्थिरता और ट्रैवल व एक्सचेंज सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के दबाव को ऑफसेट कर पाती है।
