Tea Board of India ने प्रोड्यूसर्स को बेहतर दाम दिलाने के लिए डिब्रूगढ़ और जोरहाट में नए ऑक्शन सेंटर खोले हैं। साथ ही, चाय की खेती में उत्पादकता बढ़ाने के लिए 'TocklAI' टूल लॉन्च किया गया है, ताकि गिरती कीमतों और लिक्विडिटी के दबाव से जूझ रहे सेक्टर को राहत मिल सके।
नीलामी नेटवर्क का विस्तार
Tea Board of India चाय उत्पादकों की घटती कमाई को देखते हुए अपने फिजिकल ऑक्शन नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। डिब्रूगढ़ और जोरहाट में नए ऑक्शन सेंटर अब चालू हो गए हैं, जबकि अगरतला में सुविधा इस महीने के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, जलपाईगुड़ी सेंटर को फिर से खोलने और अरुणाचल प्रदेश में नई संभावनाओं पर काम चल रहा है। इस कदम का मकसद लॉजिस्टिक्स की बाधाओं को खत्म करना और खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर चाय बागानों के लिए बेहतर 'प्राइस डिस्कवरी' सुनिश्चित करना है।
खेती में टेक्नोलॉजी का दखल
ट्रेडिंग फ्लोर के बदलावों के अलावा, Tea Research Association ने Tocklai Tea Research Institute के साथ मिलकर 'TocklAI' पेश किया है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल मिट्टी की सेहत, कीट नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सटीक सलाह देगा। 115 साल के रिसर्च डेटा का इस्तेमाल करके बनाया गया यह सिस्टम बागान मालिकों की लागत घटाने और क्वालिटी सुधारने में मदद करेगा।
इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां
भारतीय चाय उद्योग इस समय भारी लिक्विडिटी संकट से गुजर रहा है। जुलाई और अगस्त 2026 के बीच कोलकाता, गुवाहाटी और सिलीगुड़ी जैसे बड़े केंद्रों पर चाय की कीमतों में 8% से 17% तक की गिरावट दर्ज की गई है। बढ़ती मजदूरी और बोनस के बीच कम कीमतों ने उत्पादकों की कमर तोड़ दी है।
इसके अतिरिक्त, ग्लोबल डिमांड में सुस्ती का असर एक्सपोर्ट पर भी दिखा है, जो 2026 की पहली छमाही में पिछले साल के मुकाबले 18% नीचे रहा। अत्यधिक गर्मी और बाढ़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों ने भी फसल की मात्रा और गुणवत्ता पर बुरा असर डाला है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या ये नए ऑक्शन सेंटर और टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री को इस बड़े वित्तीय दबाव से उबार पाएंगे या नहीं।
