टैरिफ में राहत और ग्लोबल फैक्टर बने सोने-चांदी के 'हीरो'
4 फरवरी 2026 को सोना और चांदी के भावों में जो ज़बरदस्त तेज़ी आई, वह बाज़ार में चल रहे बड़े बदलावों का संकेत है। यह तेज़ी किसी डर की वजह से सुरक्षित ठिकाने (safe haven) की ओर भागने की नहीं, बल्कि ट्रेड वॉर के कम होने और सेंट्रल बैंकों की बदलती नीतियों का सीधा नतीजा है। यह उछाल शेयर बाज़ार की कमजोरी से बिल्कुल अलग है, जो दिखाता है कि निवेशक किस तरह अलग-अलग एसेट क्लास पर ध्यान दे रहे हैं।
टैरिफ कटौती का असर और बाज़ार के समीकरण
सोना और चांदी की कीमतों में इस ज़ोरदार उछाल की सबसे बड़ी वजह थी अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए जाने वाले टैरिफ में बड़ी कटौती। ये टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिए गए, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव काफी कम हुआ। इसने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में उम्मीद जगाई और कमोडिटी बाज़ारों के लिए अच्छा संकेत दिया। इसी के साथ, अमेरिकी डॉलर के कमजोर पड़ने से भी बुलियन (सोना-चांदी) को सपोर्ट मिला, क्योंकि डॉलर-डिनॉमिनेटेड एसेट्स अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो गए। इन सबके अलावा, बाज़ार पार्टिसिपेंट्स 2026 के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा कम से कम दो बार ब्याज दरें घटाए जाने की उम्मीद को भी भुना रहे थे, जो ऐतिहासिक रूप से सोने जैसी नॉन-यील्ड एसेट्स के लिए फ़ायदेमंद रहा है।
शेयर बाज़ार बनाम कमोडिटी: अलग-अलग चाल
MCX पर सोना फ्यूचर्स 4.25% चढ़कर ₹1,60,351 पर पहुँचा, जबकि चांदी 4.77% की बढ़त के साथ ₹2,80,800 पर बंद हुई। वहीं, COMEX पर सोना 3.00% बढ़कर $5,083.06 और चांदी 4.48% की तेज़ी के साथ $87.035 पर कारोबार कर रही थी। इसके विपरीत, 4 फरवरी 2026 को ब्रॉड इक्विटी मार्केट्स की तस्वीर कुछ और थी। S&P 500 इंडेक्स 0.9% और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.4% नीचे गिरे। इससे साफ हुआ कि निवेशक इक्विटी से निकलकर कमोडिटी की ओर रुख कर रहे हैं। यह उछाल पिछले कुछ दिनों की भारी उथल-पुथल के बाद आया है, जब सोने में करीब 20% और चांदी में लगभग 30% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई थी। मौजूदा तेज़ी को 'बॉटम-फिशिंग' और पॉजिटिव मैक्रो न्यूज़ का सहारा मिला है, जो यह दर्शाता है कि पिछली गिरावटें लंबी अवधि के कारणों में बदलाव का संकेत नहीं थीं। इसी दिन कॉपर (तांबा) भी 3.6% की तेज़ी के साथ ऊपर चढ़ा।
विश्लेषकों की राय और ईटीएफ का प्रदर्शन
कीमती धातुओं के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने भी अपने अंडरलाइंग एसेट्स के साथ तालमेल बिठाते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। कई गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ़ में एक दिन में 9-13% तक की अच्छी बढ़त देखी गई। एनालिस्ट्स का कहना है कि पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड एक पसंदीदा एसेट बना हुआ है, और इसके दाम बढ़ने की और संभावना है। जे.पी. मॉर्गन का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना $6,300 प्रति औंस तक पहुँच सकता है। कुछ लोग भू-राजनीतिक तनाव कम होने से 'सेफ हेवन' की मांग घटने की बात कह रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि खुदरा और संस्थागत खरीदारों की लगातार खरीदारी की वजह से सोने की कीमतों में ज़्यादा गिरावट की गुंजाइश कम है। 2025 में ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ़ में रिकॉर्ड निवेश (inflows) आया था, जिसमें एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर $559 बिलियन हो गया था, जो ट्रेड विवादों और बाज़ार की अस्थिरता के बीच 'सेफ हेवन' की मांग को दर्शाता है। हालांकि, जनवरी 2026 में कुछ सिल्वर ईटीएफ़ से पैसे निकलते (outflows) भी देखे गए, जो 4 फरवरी के मजबूत उछाल से थोड़ा अलग था। इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट्स का सुझाव है कि पोर्टफोलियो का करीब 10% गोल्ड में और चांदी को उसकी ज़्यादा अस्थिरता (volatility) के कारण एस.आई.पी. (SIP) के ज़रिए लंबी अवधि में जमा करना चाहिए।
आगे की राह
आने वाले समय में, सोना और चांदी की कीमतें फेडरल रिजर्व की पॉलिसी उम्मीदों और भू-राजनीतिक विकास पर निर्भर रहेंगी। मौजूदा तेज़ी, जो ट्रेड डी-एस्केलेशन और मॉनेटरी ईजिंग की संभावनाओं पर आधारित है, नज़दीकी अवधि में इक्विटी के मुकाबले कमोडिटी को प्राथमिकता दे रही है। हालाँकि, बाज़ार पर नज़र रखने वाले यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अहम आर्थिक डेटा और भू-राजनीतिक तनावों के दोबारा उभरने से बाज़ार में फिर से अस्थिरता आ सकती है। ईटीएफ़ का बढ़ता चलन, जो कीमती धातुओं में निवेश का एक मुख्य ज़रिया बन गया है, आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, जिससे ज़्यादा लोगों की भागीदारी और लिक्विडिटी बढ़ेगी।
