ईरानी कच्चे तेल का खेल बिगाड़ा पेमेंट ने! टैंकर यू-टर्न, अब सीधे चीन की ओर

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AuthorAditya Rao|Published at:
ईरानी कच्चे तेल का खेल बिगाड़ा पेमेंट ने! टैंकर यू-टर्न, अब सीधे चीन की ओर
Overview

ईरानी कच्चे तेल (Iranian crude oil) से लदा एक बड़ा टैंकर, जो पहले भारत आने वाला था, अब चीन की ओर मुड़ गया है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट के बावजूद भुगतान (payment) से जुड़ी दिक्कतें बताई जा रही हैं।

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पेमेंट की बाधा ने वेवर को किया बेअसर

हाल ही में Ping Shun नाम के एक टैंकर में लदा 6 लाख बैरल ईरानी क्रूड ऑयल, जो भारत आने वाला था, को अचानक चीन की ओर मोड़ दिया गया। यह घटना दिखाती है कि भले ही अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने पर लगी पाबंदियों में कुछ समय के लिए ढील दी हो, लेकिन असली पेंच भुगतान (payment) को लेकर फंसा हुआ है। 21 मार्च को अमेरिकी सरकार ने एक डिक्री जारी कर कहा था कि जो तेल पहले से ही जहाजों में लोड है, वह 19 अप्रैल तक बाजारों तक पहुंच सकता है। इसका मकसद ग्लोबल सप्लाई बढ़ाना था।

Ping Shun टैंकर करीब 4 मार्च को लोड हुआ था, इसलिए वह इस वेवर के दायरे में आता था। लेकिन, इसके रूट में अचानक बदलाव यह बताता है कि भले ही माल के ट्रांसपोर्ट पर अस्थायी छूट मिल गई हो, लेकिन ईरान के साथ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (financial transactions) में आज भी बड़ी मुश्किलें हैं। ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल बेचने वाले अब पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। वे ग्राहकों को 30-60 दिन की क्रेडिट (credit) देने के बजाय, अब तुरंत या बहुत कम समय में पेमेंट की मांग कर रहे हैं। इससे ईरान से तेल खरीदने वाले, खासकर भारतीय रिफाइनरियों को नुकसान हो रहा है, क्योंकि उनके पास चीन जैसे खरीदारों की तरह आसान पेमेंट चैनल नहीं हैं।

भारत की कोशिशें और चीन का दबदबा

भारत, जिसने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के दोबारा लागू होने के बाद से ईरानी क्रूड खरीदना बंद कर दिया था, इस बार वेवर का फायदा उठाना चाहता था। विश्लेषकों को उम्मीद थी कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने रूस से तेल खरीदना बढ़ाया था, वैसे ही ईरान से भी तेल खरीद सकती हैं। लेकिन, इस घटना से साफ है कि ऐसी संभावनाएं सिर्फ लॉजिस्टिक्स (logistics) पर ही नहीं, बल्कि जटिल फाइनेंशियल सिस्टम्स (financial systems) को संभालने पर भी निर्भर करती हैं।

दूसरी ओर, चीन दशकों से ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। वह ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से ज्यादा खरीदता है। चीन का पेमेंट सिस्टम ईरान के लिए ज्यादा स्मूथ है। Ping Shun का चीन के डोंगयिंग (Dongying) बंदरगाह की ओर मुड़ना इसी पुरानी व्यापारिक साझेदारी को पुख्ता करता है। Kpler के सुमित रितोलिया के मुताबिक, ईरान क्रूड के साथ शिपमेंट के बीच में ही रूट बदलना आम बात है और यह दिखाता है कि ट्रेड फ्लो कितना संवेदनशील है। अगर पेमेंट की दिक्कतें दूर हो गईं, तो यह कार्गो अभी भी भारत भेजा जा सकता है, लेकिन यह साफ है कि कमर्शियल शर्तें (commercial terms) लॉजिस्टिक्स जितनी ही अहम हैं।

ईरानी तेल के लिए लगातार फाइनेंशियल रुकावटें

भले ही अमेरिका ने कुछ खास कार्गो के लिए पाबंदियों में अस्थायी ढील दे दी हो, लेकिन ईरान का फाइनेंशियल आइसोलेशन (financial isolation) उसके क्रूड एक्सपोर्ट के लिए लगातार मुश्किलें पैदा कर रहा है, खासकर चीन के बाहर। ईरान और उसके बैंक, इंटरनेशनल पेमेंट के लिए मुख्य नेटवर्क SWIFT (सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) से बाहर हैं। इस वजह से, और बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के ईरान के साथ ट्रांजैक्शंस करने में हिचकिचाने के कारण, दिक्कतें बनी हुई हैं। Ping Shun का रूट बदलना यह संकेत देता है कि अगर फिजिकल ट्रांसपोर्ट की दिक्कतें कम भी हो जाएं, तो भी इन डील्स के लिए जरूरी फाइनेंशियल सिस्टम अभी भी कमजोर हैं। सऊदी अरब या इराक जैसे देशों के विपरीत, जिनका तेल स्टैंडर्ड और अप्रूव्ड फाइनेंशियल चैनल्स से बिकता है, ईरानी क्रूड में सेटलमेंट की समस्याएं अंतर्निहित हैं। यह संरचनात्मक कमजोरी चीन जैसे स्थापित खरीदारों को फायदा पहुंचाती है। साथ ही, विक्रेताओं द्वारा छोटी क्रेडिट टर्म्स की मांग, वेवर के बावजूद ट्रेडर्स और फाइनेंशियल प्लेयर्स के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.