ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स के मुताबिक 'Super El Niño' का साया **2027** तक बना रह सकता है। समुद्र के तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से भारत में मानसून, खेती और ग्रामीण डिमांड पर गहरा संकट मंडरा रहा है, जिसका सीधा असर ट्रैक्टर, फर्टिलाइजर और FMCG सेक्टर पर पड़ सकता है।
प्रशांत महासागर में उपजा 'Super El Niño' अब और भी खतरनाक होता जा रहा है। लेटेस्ट फोरकास्ट के अनुसार, यह क्लाइमेट इवेंट 2027 तक खिंच सकता है। मेट्रोलॉजिकल डेटा के मुताबिक, नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र का तापमान +2.4°C के स्तर को पार कर गया है, जो सामान्य से काफी ज्यादा है। इससे दुनिया भर का मौसम बिगड़ने का डर है और 2027 सबसे गर्म सालों में से एक हो सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर मार
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। अगर बारिश कम हुई तो खरीफ और रबी फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। इससे न केवल ग्रामीण किसानों की कमाई कम होगी, बल्कि उनकी खरीदारी की क्षमता (Purchasing Power) पर भी बुरा असर पड़ेगा।
किन सेक्टरों में है रिस्क?
- FMCG: ग्रामीण इलाकों में डिमांड घटने से वॉल्यूम ग्रोथ पर दबाव दिख सकता है।
- ट्रैक्टर और फर्टिलाइजर: खेती की बुआई में कमी का सीधा असर ट्रैक्टर की बिक्री और फर्टिलाइजर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
महंगाई और आरबीआई का रुख
अगर मानसून बिगड़ा, तो चावल, चीनी और दालों की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिससे फूड इन्फ्लेशन यानी खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू सकते हैं। महंगाई बढ़ने से सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति (Interest Rate Policy) भी प्रभावित हो सकती है। अगर महंगाई बढ़ती रही, तो ब्याज दरों में राहत की उम्मीद कम हो जाएगी, जो मार्केट सेंटीमेंट के लिए एक बड़ा झटका होगा।
हालांकि, बाजार के जानकारों की नजर 'इंडियन ओशन डाइपोल' (IOD) पर भी है। अगर IOD पॉजिटिव फेज में रहता है, तो यह बारिश की कमी को कुछ हद तक बैलेंस कर सकता है। फिलहाल निवेशकों को इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के डेटा और कंपनियों की अगली अर्निंग रिपोर्ट में रूरल डिमांड पर आने वाली कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
