Balrampur Chini, Triveni Engineering: इथेनॉल डिमांड से शेयर रॉकेट, पर ₹485 के पार कंपनियों पर मंडराया प्राइसिंग का संकट!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Balrampur Chini, Triveni Engineering: इथेनॉल डिमांड से शेयर रॉकेट, पर ₹485 के पार कंपनियों पर मंडराया प्राइसिंग का संकट!
Overview

शुगर सेक्टर के शेयरों में आज गजब की तेजी देखने को मिली, जिसमें Balrampur Chini Mills और Triveni Engineering & Industries जैसे दिग्गज शामिल हैं। इस उछाल की मुख्य वजह इथेनॉल (Ethanol) की बढ़ती मांग और सरकारी नीतियों का सपोर्ट है, जिसने बायोफ्यूल (Biofuel) सेक्टर को नई उड़ान दी है।

इथेनॉल की डिमांड से शेयर चमके, पर सता रहा प्राइसिंग का डर

भारत के बायोफ्यूल सेक्टर में निवेशकों का इंटरेस्ट तेजी से बढ़ा है। सरकार के इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयासों और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल ने इथेनॉल को ईंधन के तौर पर और भी आकर्षक बना दिया है। इसी का नतीजा है कि Balrampur Chini Mills और Triveni Engineering & Industries के शेयर बाजार के बाकी इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्टॉक की चाल और वैल्यूएशन

Balrampur Chini Mills के शेयर फिलहाल करीब ₹485 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, जिनका P/E रेश्यो 21-23x के आसपास है। वहीं, Triveni Engineering के शेयर ₹395 के करीब हैं और इनका P/E रेश्यो 25-28x है। यह तेजी इथेनॉल की लगातार बनी रहने वाली मांग की उम्मीदों पर आधारित है। सरकार का 2026 तक 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य और 2025-26 सप्लाई ईयर के लिए उत्पादन पर लगी पाबंदियों को हटाना, बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा देगा।

कॉम्पिटिटर्स और ग्लोबल शुगर का असर

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Balrampur Chini और Triveni Engineering अपने कुछ कॉम्पिटिटर्स जैसे Dhampur Sugar Mills (P/E 11-12x) की तुलना में महंगे वैल्युएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। Dwarikesh Sugar Industries का P/E रेश्यो 34-37x है। पिछले साल Balrampur Chini के शेयर में करीब 10% की गिरावट आई थी, जबकि Triveni Engineering में मामूली बढ़ोतरी देखी गई। भारत में इथेनॉल पर फोकस के बावजूद, 2025-26 सीजन के लिए एक बड़ा ग्लोबल शुगर सरप्लस (Global Sugar Surplus) आने की उम्मीद है, जो चीनी की कीमतों और प्रॉफिट पर लगाम लगा सकता है।

मुख्य चिंता: लागत बढ़ी, दाम वहीं के वहीं

इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चिंता इथेनॉल खरीद मूल्य (Ethanol Procurement Price) में किसी भी बढ़ोतरी का न होना है। पिछले तीन सालों में गन्ने की कीमतें और अन्य ऑपरेटिंग लागतें काफी बढ़ी हैं, लेकिन गन्ने के रस (Cane Juice) और शीरा (Molasses) से बनने वाले इथेनॉल के दाम में कोई बदलाव नहीं आया है। Balrampur Chini Mills ने भी अपनी अर्निंग कॉल में इस बात पर जोर दिया था कि दाम में बदलाव से ऑयल कंपनियों या ग्राहकों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया है।

डिस्टिलरी पर खतरा

यह प्राइसिंग का गतिरोध सीधे तौर पर डिस्टिलरी (Distillery) ऑपरेशंस के मुनाफे को प्रभावित कर रहा है। सरकार ने गन्ने के रस और शीरा से इथेनॉल के असीमित उत्पादन की अनुमति दी है, जिससे वॉल्यूम तो बढ़ा है, लेकिन प्रति यूनिट कमाई नहीं बढ़ी है। Triveni Engineering, जिसका बिजनेस डिस्टिलरी पर काफी निर्भर है, के लिए यह प्राइसिंग इशू कमाई के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा करता है। इंडस्ट्री पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है, इसलिए भविष्य का मुनाफा प्राइसिंग और डिस्टिलरी सपोर्ट पर सरकारी नीतियों से जुड़ा रहेगा, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।

एनालिस्ट की उम्मीदें बनाम हकीकत

एनालिस्ट (Analysts) आम तौर पर Balrampur Chini Mills के लिए 'Strong Buy' रेटिंग और बड़े प्राइस टारगेट के साथ पॉजिटिव दिख रहे हैं। उनके अनुमान हैं कि कंपनी दमदार कमाई और रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज करेगी, जिसमें तीन साल में लगभग 14.5% रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity) मिलने की उम्मीद है। Triveni Engineering के लिए भी एनालिस्ट टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं। यह उम्मीदें इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के विस्तार और बढ़ते वॉल्यूम पर आधारित हैं। हालांकि, यह उम्मीदें बढ़ती लागतों के मुकाबले स्थिर इथेनॉल प्राइसिंग और ग्लोबल शुगर सरप्लस जैसी चुनौतियों को पूरी तरह से ध्यान में नहीं रखती हैं। इन कंपनियों की इन पॉलिसी-ड्रिवन मार्जिन को मैनेज करने की क्षमता ही मौजूदा वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

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