चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इंपोर्ट (Import) नियमों में ढील दी है। इस फैसले के बाद घरेलू शुगर कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। Balrampur Chini और Shree Renuka जैसे शेयरों में **3.5%** तक की नरमी देखी गई।
इंपोर्ट नियमों में बड़े बदलाव
सरकार ने कच्चे चीनी के आयात को लेकर जो नियम बनाए थे, उसमें बड़ा बदलाव किया है। पहले 31 अक्टूबर 2026 तक इंपोर्ट किए गए चीनी को रिफाइन करके बेचने की आखिरी तारीख तय थी। लेकिन अब इस नियम को बदलकर इंपोर्टर के बिल ऑफ एंट्री फाइल करने की तारीख से दो महीने का फ्लेक्सिबल विंडो दे दिया गया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री कच्चे चीनी के इंपोर्ट कोटे के लिए यह घोषणा की है। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें कंट्रोल होंगी।
क्यों आई कीमतें और क्यों हुआ ये फैसला?
दरअसल, पिछले कुछ समय से देश में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। जुलाई में जहां यह ₹48 प्रति किलो के करीब थी, वहीं अगस्त के अंत तक यह ₹63 प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़त की वजह घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना ( 306 LMT , जो पहले 343 LMT अनुमानित था) और डीलर्स द्वारा जमाखोरी की आशंकाएं हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने सप्लाई बढ़ाने का यह कदम उठाया है।
शेयर बाजार पर असर
सरकार के इस कदम से चीनी कंपनियों के शेयर, जैसे Balrampur Chini Mills, Bajaj Hindusthan Sugar, और Shree Renuka Sugars पर दबाव देखा गया। 25 अगस्त 2026 को इन कंपनियों के शेयर 3.5% तक गिर गए। निवेशकों को चिंता है कि इंपोर्टेड चीनी के बाजार में आने से घरेलू मिलों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या?
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए थोक खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट को भी घटाकर 15 दिन का कर दिया है, जो 1 सितंबर से लागू होगा। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है, और चीनी की डिमांड बढ़ जाती है। सरकार मिलों की बिक्री पर भी कड़ी नजर रख रही है और उनसे अगस्त के आखिर में हुई बिक्री का विस्तृत डेटा मांगा गया है।
