बाजार में चीनी के रिटेल दाम उछलकर **₹59.50** प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। उत्पादन में कमी और त्योहारी सीजन की भारी मांग के बीच शुगर कंपनियों के सामने सप्लाई और रेगुलेटरी चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है।
देशभर में चीनी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले साल के ₹46.50 प्रति किलो के मुकाबले अब रिटेल मार्केट में दाम ₹59.50 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। हालात यह हैं कि कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों में तो कीमतें ₹65 और ₹64 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिससे खाने-पीने की चीजों में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
कीमतों में इस तेजी के पीछे 2025-26 साइकिल का प्रोडक्शन मिसमैच मुख्य वजह है। फसल खराब होने और त्योहारों के दौरान मांग में भारी बढ़ोतरी ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 2026-27 सप्लाई ईयर के लिए गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी मोलासेस को इथेनॉल में बदलने पर पाबंदी लगा दी है, ताकि घरेलू चीनी की उपलब्धता बनी रहे।
शुगर कंपनियों पर असर
बढ़ती कीमतों का असर कंपनियों के फाइनेंशियल रिजल्ट्स में भी दिख रहा है। Triveni Engineering और Dalmia Bharat Sugar जैसी दिग्गज कंपनियों के Q2 नतीजे बेहतर रहे हैं क्योंकि उन्हें चीनी की ऊंची कीमतें मिल रही हैं। हालांकि, टॉप-लाइन ग्रोथ के साथ-साथ ऑपरेशनल चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। सीजन जल्दी शुरू करने के बावजूद, अभी 152 मिलों ने 8.45 लाख टन चीनी का ही उत्पादन किया है।
निवेशक क्या ट्रैक करें?
निवेशकों के लिए इस वक्त कुछ बड़े रिस्क हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में किसानों द्वारा गन्ने की कीमतों को लेकर मिलों के कामकाज में बाधा पैदा की जा रही है। किसान FRP (Fair and Remunerative Price) से ज्यादा दाम की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, अगर रिटेल महंगाई कम नहीं हुई, तो सरकार इंपोर्ट ड्यूटी में राहत दे सकती है, जो घरेलू कंपनियों के लिए खतरा साबित होगा। फिलहाल, उत्पादन के आंकड़े, इथेनॉल पर सरकारी रुख और किसान-मिल विवाद पर नजर रखना सबसे जरूरी है।
