चीनी के खुदरा दाम बढ़कर **₹60** प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जिसे काबू करने के लिए सरकार ने महाराष्ट्र की चीनी मिलों को **15 अक्टूबर** से ही पेराई (crushing) शुरू करने का आदेश दिया है।
महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए महाराष्ट्र की चीनी मिलों को 15 अक्टूबर, 2026 से पेराई सीजन शुरू करने का निर्देश दिया है। यह तारीख पारंपरिक तौर पर शुरू होने वाले नवंबर महीने से काफी जल्दी है। साथ ही, जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट को आधा करके 2,000 क्विंटल कर दिया गया है, जो 15 सितंबर से 30 नवंबर, 2026 तक लागू रहेगी।
मिलों के सामने वित्तीय संकट
इस फैसले से चीनी मिलों के मार्जिन पर सीधा दबाव दिख रहा है। ISMA और NFCSF जैसे इंडस्ट्री संगठनों का कहना है कि गन्ना पूरी तरह पकने से पहले कटाई करने से 'शुगर रिकवरी रेट' में 2% से 3% तक की भारी गिरावट आ सकती है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के प्रॉफिट को चोट पहुंचाएगी। नुकसान की भरपाई के लिए मिलें सरकार से GST में छूट और सॉफ्ट लोन की मांग कर रही हैं।
ऑपरेशन्स और लेबर की चुनौती
जल्दी सीजन शुरू करने के आदेश से ऑपरेशनल चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। दिवाली के बाद मजदूर मिलों तक पहुंचते हैं, ऐसे में 15 अक्टूबर तक ऑपरेशन्स शुरू करने से लेबर शॉर्टेज का खतरा है। साथ ही, अपरिपक्व गन्ने की कटाई से अगले सीजन की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए अब रिकवरी रेट और सरकारी राहत पैकेज पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
