Sugar Prices: 17 महीने की ऊंचाई से लुढ़की चीनी, सरकारी एक्शन से कीमतों में आई गिरावट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Sugar Prices: 17 महीने की ऊंचाई से लुढ़की चीनी, सरकारी एक्शन से कीमतों में आई गिरावट

चीनी के दाम में जारी तेजी पर अब ब्रेक लग गया है। भारत सरकार की ओर से स्टॉक लिमिट घटाने और **10 लाख टन** ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की मंजूरी के बाद रॉ शुगर फ्यूचर्स में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

सरकारी सख्ती का असर

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी को ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट करने की अनुमति दी है, जो 31 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेगी। इसके साथ ही, जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट को 400 मीट्रिक टन से घटाकर 200 मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह नया नियम 15 सितंबर से 20 नवंबर, 2026 तक प्रभावी है।

बाजार में कीमतों की स्थिति

इन फैसलों का असर तुरंत घरेलू बाजार में दिखा है। महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में एक्स-मिल चीनी की कीमतें जो पहले ₹6,200 प्रति क्विंटल के पार थीं, अब घटकर ₹4,500 से ₹5,200 प्रति क्विंटल के दायरे में आ गई हैं। हालांकि, रिटेल मार्केट में इसका असर दिखने में अभी थोड़ा समय लग सकता है।

मिलों के लिए चुनौती

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल मिलों की प्रॉफिटेबिलिटी का है। फिलहाल उत्पादन लागत ₹4,200 से ₹4,300 प्रति क्विंटल के आसपास है। अगर कीमतें और गिरती हैं, तो मिलों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।

ग्लोबल मार्केट का हाल

घरेलू स्तर पर भले ही राहत हो, लेकिन ग्लोबल स्तर पर एल नीनो (El Niño) और यूरोपीय संघ में कमजोर फसल के चलते सप्लाई की चुनौती अभी बनी हुई है। आने वाले समय में सरकार की पॉलिसी और मिलों के मार्जिन पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.