इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने साफ कर दिया है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। हाल में कीमतों में आई तेजी की वजह मार्केट में चल रही अटकलें (Speculation) थीं। सरकार ने फेस्टिव सीजन से पहले सप्लाई ठीक करने के लिए **10 लाख टन** तक ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट (Import) की इजाजत दे दी है। इस खबर के बाद **24 अगस्त** को शुगर स्टॉक्स में रिकवरी देखने को मिली।
क्या वाकई है चीनी की कमी?
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के प्रेसिडेंट नीरज शिरगाओंकर का कहना है कि देश में चीनी की सप्लाई की कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल ही में चीनी की कीमतों में 24% की बढ़ोतरी हुई थी, जो ₹56-60 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। यह तेजी असल में स्टॉक जमा करने (Stocking) और मौसम की वजह से प्रोडक्शन पर पड़े असर को लेकर चल रही अटकलों के कारण आई थी, न कि चीनी की असल कमी के चलते।
इंपोर्ट से कीमतों पर लगाम
त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को मंजूरी दी है। यह इंपोर्ट 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। इस कदम का मकसद सप्लाई बढ़ाना और जमाखोरी को रोकना है, जिससे खुदरा कीमतें नीचे आ सकें।
मार्केट का रिएक्शन
इंपोर्ट पॉलिसी के ऐलान के बाद शुगर स्टॉक्स में थोड़ी उथल-पुथल देखी गई। 21 अगस्त को सप्लाई बढ़ने और मार्जिन पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता के कारण शेयर गिरे थे। लेकिन 24 अगस्त तक निवेशकों का भरोसा वापस लौटा और Bajaj Hindusthan और Shree Renuka Sugars जैसी कंपनियों के शेयरों में तेजी आई। Bajaj Hindusthan के शेयर में 12.4% का उछाल दर्ज किया गया।
इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां
इंपोर्ट का फैसला भले ही मार्केट को स्थिर करने के लिए हो, लेकिन इंडस्ट्री के सामने कुछ प्रैक्टिकल चुनौतियां भी हैं। फिलहाल इंपोर्ट के लिए ब्राजील मुख्य सोर्स है, क्योंकि थाईलैंड खुद सप्लाई की दिक्कत झेल रहा है। ब्राजील से भारत आने वाले शिपमेंट में 40-45 दिन लगते हैं। ऐसे में, अक्टूबर में नया क्रशिंग सीजन शुरू होने तक डोमेस्टिक सप्लाई टाइट रह सकती है। इसके अलावा, खराब मौसम, अनियमित बारिश और रेड रॉट जैसी बीमारियों का खतरा गन्ने की पैदावार और प्रोडक्शन क्वालिटी पर असर डाल सकता है।
