मार्जिन पर क्यों पड़ा दबाव?
इस तिमाही में कंपनी के मार्जिन पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे माल की कीमतों में लगातार तेजी और करेंसी में प्रतिकूल उतार-चढ़ाव रहा। इन सबने मिलकर EBITDA मार्जिन को पिछले साल के 9.2% से घटाकर 8.6% कर दिया, यानी 65 बेसिस पॉइंट (bps) की गिरावट आई। इसके अलावा, नई लेबर लॉ लागू होने के कारण कंपनी पर ₹8 करोड़ का अतिरिक्त खर्च भी पड़ा। नेट प्रॉफिट मार्जिन में भी 32 bps की गिरावट देखी गई।
EV सेगमेंट में कैसे बन रही बात?
Subros पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है, जहां कंपनी की मार्केट में करीब 41% हिस्सेदारी है। अब कंपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) के बढ़ते अवसरों का फायदा उठाने पर फोकस कर रही है, क्योंकि EV वाहनों में थर्मल मैनेजमेंट (thermal management) का कंटेंट काफी ज्यादा होता है। Subros पहले ही Maruti Suzuki और Mahindra के EV प्रोग्राम के लिए सप्लाई शुरू कर चुकी है और Tata Motors व Hyundai/Kia जैसी कंपनियों के साथ भी बातचीत के अंतिम दौर में है।
इस बीच, कंपनी को एक बड़ी खुशखबरी मिली है। Subros ने अगले 7 साल के लिए इलेक्ट्रिक और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (SHEV) वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक कंप्रेसर (electric compressor) की सप्लाई का ₹1,280 करोड़ का ऑर्डर हासिल किया है। इस ग्रोथ को सहारा देने के लिए, कंपनी अपने कारसनपुरा (Karsanpura) प्लांट में ई-कंप्रेसर और ICE वाहनों के लिए फिक्स्ड डिस्प्लेसमेंट कंप्रेसर (FDC) की क्षमता बढ़ा रही है।
पैसेंजर व्हीकल से आगे की रणनीति
कंपनी की कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी अच्छी पकड़ है, जहां ACs और ब्लोअर्स में इसकी मार्केट हिस्सेदारी करीब 42% है। इसके अलावा, Buses और Railways जैसे सेग्मेंट्स में भी कंपनी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। Railways सेगमेंट एक और ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है। Q3 में, Subros को इंडियन रेलवे से कैब HVAC यूनिट्स के लिए ₹52 करोड़ का 3 साल का मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है। मैनेजमेंट ने यह भी संकेत दिया है कि कंपनी वंदे भारत ट्रेनों के लिए HVAC टेंडर्स में बिडिंग शुरू कर चुकी है।
भविष्य की राह और वैल्यूएशन
FY26 में PV और CV दोनों सेगमेंट से मॉडरेट सेल्स ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव फिलहाल बना रह सकता है, जिससे Q4 में भी मार्जिन पर असर दिख सकता है। Subros अपनी टेक्नोलॉजी और सप्लाई पार्टनरशिप के दम पर आगे बढ़ रही है। कंपनी लागत दक्षता (cost-efficiency) और मार्जिन को बेहतर बनाने के लिए लोकलाइजेशन (localization) पर जोर दे रही है।
फिलहाल, शेयर का वैल्यूएशन (valuation) 23x FY27e अर्निंग्स के आसपास है। एनालिस्ट्स का मानना है कि नियर-टर्म में बड़े उत्प्रेरक (catalysts) सीमित हैं और मार्जिन पर दबाव बने रहने की आशंका है, इसलिए शेयर में सीमित अपसाइड की गुंजाइश दिख रही है।