Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही लगातार सामान्य से कम बनी हुई है। बुधवार को केवल **10** कमोडिटी वेसल ही गुजरे, जबकि औसत **15** रहता है। Iran और Oman के बीच जारी बातचीत और हालिया हमलों ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में चिंता बढ़ा दी है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी चौकपॉइंट्स में से एक, Strait of Hormuz में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार के आंकड़े बताते हैं कि यहाँ से केवल 10 कमोडिटी वेसल ही गुजर सके, जो कि 15 जहाजों के 10-दिवसीय मूविंग एवरेज से काफी नीचे है। यह डेटा साफ संकेत देता है कि इस रूट पर सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।
कूटनीतिक बातचीत और शर्तें
मार्केट की नजरें Iran और Oman के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हैं, जहाँ एक जॉइंट मैरीटाइम कॉरिडोर बनाने पर चर्चा हो रही है। हालांकि, तेहरान का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। ईरान का साफ कहना है कि जलडमरूमध्य का पूरा कामकाज तभी सामान्य होगा जब अमेरिका अपना नेवल नाकाबंदी हटाएगा और ईरानी पोर्ट्स पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म करेगा। बिना किसी ठोस समझौते के, ऑयल और गैस की ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है।
सुरक्षा जोखिम और भारतीय निवेशकों पर असर
क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति ने एनर्जी मार्केट की वोलाटिलिटी को और बढ़ा दिया है। UKMTO की रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 अगस्त, 2026 को एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद जहाजों के बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
ग्लोबल मार्केट में इसका असर साफ दिख रहा है। Brent Crude की कीमतें लगभग $87.38 प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थीं, जिसमें 0.5% की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता है। यदि यह गतिरोध बना रहता है, तो ग्लोबल ऑयल प्राइज और फ्रेट कॉस्ट बढ़ने का सीधा असर भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ सकता है।
