होरमुज़ जलडमरूमध्य में 15% गिरी जहाजों की आवाजाही, बढ़ रहा है तनाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
होरमुज़ जलडमरूमध्य में 15% गिरी जहाजों की आवाजाही, बढ़ रहा है तनाव

होरमुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक अहम रास्ता है, से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में 8 जुलाई को **15%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस कमी का मुख्य कारण क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव और नेविगेशन सिस्टम में आई दिक्कतें हैं।

नेविगेशन में दिक्कत और बढ़ा परिचालन जोखिम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) में आई खराबी के कारण जहाजों के लिए अपनी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया है। इस अनिश्चितता के चलते कई जहाजों को अपनी यात्रा में देरी करनी पड़ी या उन्हें वापस लौटना पड़ा। इससे शिपिंग कंपनियों के लिए परिचालन जोखिम (operational risk) बढ़ गया है। 8 जुलाई को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की कुल संख्या घटकर 41 रह गई, जबकि पिछले दिन यह 48 थी।

खाड़ी से बाहर जाने वाले जहाजों की संख्या अंदर आने वाले जहाजों से ज्यादा रही। 26 जहाज खाड़ी से बाहर निकले, जबकि 15 अंदर आए। डेटा से यह भी पता चला है कि बाहर जाने वाले जहाजों का एक बड़ा हिस्सा ईरान से जुड़ा था। इसके अलावा, कुछ जहाजों ने अपने ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) सिग्नल प्रसारित किए बिना यात्रा की, जिससे समुद्री यातायात की निगरानी में और अधिक अनिश्चितता पैदा हुई।

कच्चे तेल के प्रवाह पर असर

जहाजों की संख्या में कमी के बावजूद, क्षेत्र से गुजरने वाले कच्चे तेल की मात्रा में अभी तक कोई खास असर नहीं दिखा है। 6 से 8 जुलाई के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल का प्रवाह औसतन 12.76 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा। इस महीने अब तक कच्चे तेल का कुल निर्यात औसतन 10.81 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा है। यह शिप-टू-शिप ट्रांसफर और पहले से निष्क्रिय पड़े बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) की तैनाती के कारण संभव हुआ है।

भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति काफी अहम है, क्योंकि भारत अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। अगर तनाव लगातार बढ़ता है, तो चिंता का विषय न केवल तेल की मात्रा होगी, बल्कि बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत में वृद्धि की भी संभावना है। यात्रा जोखिम बढ़ने से तेल मार्केटिंग कंपनियों के परिचालन खर्च बढ़ सकते हैं और लगातार ऊर्जा आयात पर निर्भर कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

भविष्य की ऊर्जा लागतों पर नजर

निवेशकों को खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और समुद्री यातायात की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। मुख्य बात यह है कि शिपिंग ऑपरेटर मौजूदा आवाजाही बनाए रखते हैं या नेविगेशन में लगातार आ रही दिक्कतें लॉजिस्टिक्स में स्थायी व्यवधान पैदा करती हैं। शिपिंग बीमा दरों में कोई भी निरंतर वृद्धि या कार्गो आवाजाही में भारी गिरावट ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन की दक्षता पर दबाव का संकेत दे सकती है, जिसका अंततः व्यापक सेक्टर प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।

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