Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही घटकर मात्र **7** रह गई है, जो **14** के हालिया औसत से काफी कम है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल मचा दी है और दाम **$100** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए हैं।
घटती आवाजाही का संकट
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक, Strait of Hormuz में हलचल थम सी गई है। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को यहां सिर्फ 7 जहाज ही देखे गए, जबकि सामान्य दिनों में यहां 100 से 125 जहाज प्रतिदिन निकलते थे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण कई टैंकरों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं, जिससे समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
'डार्क' शिपिंग का बढ़ा चलन
मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन होता जा रहा है क्योंकि कई जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं, जिसे 'डार्क' शिपिंग कहा जाता है। हालांकि, 'Finland Prosperity' नाम का एक बड़ा क्रूड कैरियर (VLCC) 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर सफलतापूर्वक निकलने में कामयाब रहा। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान एक भी LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) टैंकर इस रास्ते से नहीं गुजरा।
दूसरे रास्तों पर क्या असर?
जहां Persian Gulf में तनाव चरम पर है, वहीं Red Sea का Bab el-Mandeb Strait अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। वहां बुधवार को 28 कमोडिटी जहाज सुरक्षित निकले, जो पिछले 10 दिनों के औसत के बराबर है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अस्थिरता का सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा है। बढ़ते इंश्योरेंस प्रीमियम और जहाजों के रूट बदलने की लागत ने लॉजिस्टिक कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। तेल की बढ़ती कीमतें और सैन्य तनाव का यह माहौल फिलहाल सप्लाई चेन में बड़े रिस्क की ओर इशारा कर रहा है। निवेशकों को आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
