US-Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही घटकर मात्र **3** रह गई है। Bab el-Mandeb Strait में भी सुस्ती देखी जा रही है, जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई और भारतीय मार्केट के लिए चिंता का विषय है।
जहाजों की संख्या में बड़ी गिरावट
Kpler के डेटा के अनुसार, Strait of Hormuz से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या मंगलवार को गिरकर सिर्फ 3 रह गई। यह आंकड़ा पिछले 10 दिनों के 15 जहाजों के औसत से काफी कम है। यह इलाका दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण मैरीटाइम चौकपॉइंट है, जहां से दुनिया का लगभग 20% ऑयल और गैस गुजरता है।
क्यों घबराया है बाजार?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जुबानी जंग और कूटनीतिक तनाव के चलते ग्लोबल लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर डरे हुए हैं। यदि इस रूट पर आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है या इसे पूरी तरह बंद करने की नौबत आती है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। वहीं, Bab el-Mandeb Strait में भी जहाजों की संख्या 26 के औसत से घटकर 22 पर आ गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर है। कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर IOC, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा। अगर ये कंपनियां बढ़ते दाम का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो इनके मुनाफे पर दबाव तय है। हालांकि, ONGC और Oil India जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए तेल की ऊंची कीमतें फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
आने वाले दिनों में निवेशकों को ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस और मैरीटाइम डेटा पर नजर रखनी चाहिए। सप्लाई चेन में रुकावट ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट को प्रभावित कर सकती है, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
