हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या गिरकर रोजाना **4-8** रह गई है, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड **$107** प्रति बैरल तक उछल गया है। गणेश चतुर्थी की छुट्टी के बाद आज जब बाजार खुलेंगे, तो निवेशकों की नजरें बढ़ती ऊर्जा लागत और सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं पर रहेंगी।
संकट की गंभीरता
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियां अपने निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। सामान्य दिनों में यहां से लगभग 125 जहाज गुजरते थे, जो अब घटकर केवल 4 से 8 रह गए हैं। यह क्षेत्र दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है, और यहां जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा कॉरिडोर को संकट में डाल दिया है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। यह पाइपलाइन तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता थी, और इसकी बंदी ने एनर्जी मार्केट से एक बड़ा 'सेफ्टी वाल्व' छीन लिया है। इसके अलावा, ईरान और खाड़ी देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर होने वाली उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत भी टल गई है, जिससे स्थिति और अनिश्चित हो गई है।
भारतीय निवेशकों पर असर
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। ब्रेंट क्रूड के $107 प्रति बैरल तक पहुंचने से ट्रेड डेफिसिट बढ़ने, महंगाई बढ़ने और करेंसी में उतार-चढ़ाव आने का खतरा पैदा हो गया है। इसका सीधा असर एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा, जो ईंधन की कीमतों पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
आज बाजार में क्या देखें?
गणेश चतुर्थी की छुट्टी के बाद आज जब बाजार कारोबार शुरू करेंगे, तो सेंटीमेंट पर इन भू-राजनीतिक दबावों का असर साफ दिख सकता है। ऑटोमोबाइल और हैवी इंडस्ट्री जैसे सेक्टर, जो एनर्जी की अधिक खपत करते हैं या ग्लोबल ट्रेड पर निर्भर हैं, उन पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। आने वाले दिनों में क्रूड बेंचमार्क और पाइपलाइन की स्थिति पर अपडेट्स ही बाजार की दिशा तय करेंगे।
