Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या मंगलवार को गिरकर सिर्फ **3** रह गई है, जो कि **15** के दैनिक औसत से काफी कम है। इस सप्लाई चेन संकट से ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता आ सकती है, जिसका सीधा असर भारतीय ऑयल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा।
क्या है चिंता की वजह?
मंगलवार के डेटा के अनुसार, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट में से एक Strait of Hormuz से महज 3 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 15 के आसपास रहता है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इस रूट पर किसी भी तरह की हलचल सीधे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बड़ा रिस्क है।
भारतीय कंपनियों पर असर
अगर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो इसका असर दो तरफा होगा:
- OMCs (IOC, BPCL, HPCL): इन डाउनस्ट्रीम कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ सकती है क्योंकि अगर वे बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक नहीं पहुंचा पाईं, तो उनका मुनाफा (Margin) दबाव में आ जाएगा।
- Upstream Producers (ONGC, Oil India): इन कंपनियों को कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से फायदा मिल सकता है, हालांकि सरकारी टैक्स और नीतियों के कारण यह मुनाफा सीमित रह सकता है।
डेटा को लेकर सावधानी बरतें
मार्केट एनालिस्ट्स अभी इस डेटा पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे हैं। कई बार सुरक्षा कारणों से जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं, जिससे ट्रैकिंग डेटा में गिरावट दिखती है। इसलिए, आने वाले दिनों में डेटा रिवाइज (Revise) होने की संभावना है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निवेशकों को Brent Crude की कीमतों और मिडिल ईस्ट में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। यदि आने वाले दिनों में भी ट्रैफिक कम रहता है, तो यह सप्लाई चेन में बड़ी बाधा का संकेत हो सकता है, जो सीधे तौर पर एनर्जी-डिपेंडेंट इंडस्ट्रीज की फाइनेंशियल सेहत को प्रभावित करेगा।
