भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर: होर्मुज जलडमरूमध्य बना 'चोकपॉइंट'
अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ बढ़ते सैन्य अभियानों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य एक 'डी फैक्टो चोकपॉइंट' बन गया है। इससे वैश्विक ऊर्जा प्रवाह लगभग ठप पड़ गया है। बीमा कंपनियां कवरेज वापस ले रही हैं और शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को इस खतरनाक इलाके से दूर ले जा रही हैं। यह फिजिकल सप्लाई में रुकावट OPEC+ के उत्पादन बढ़ाने के मामूली फैसले पर भारी पड़ रही है।
कच्चे तेल में तूफानी उछाल, OPEC+ का कदम बेअसर
इस संकट के कारण ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent crude futures) में भारी उछाल आया है। 2 मार्च 2026 को यह $79.39 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, जो कि एक साल से अधिक का उच्चतम स्तर है। सिटीग्रुप (Citigroup) के विश्लेषकों का अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड आने वाले समय में $80–$90 के बीच रह सकता है, जबकि वुड मैकेंजी (Wood Mackenzie) का कहना है कि अगर शिपिंग तुरंत बहाल नहीं हुई तो कीमतें $100 प्रति बैरल को पार कर सकती हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का अनुमान है कि मौजूदा कीमतों में पहले से ही $18 प्रति बैरल का 'वॉर रिस्क प्रीमियम' शामिल है।
यह संकट 1973 के ऑयल एम्बार्गो या 1979 की ईरानी क्रांति से कहीं बड़ा है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो गया तो रोजाना 20 मिलियन बैरल से अधिक की सप्लाई ठप हो सकती है।
कम हो रही 'स्पेयर कैपेसिटी', LNG मार्केट भी संकट में
ऊर्जा बाजार में एक और बड़ी चिंता 'स्पेयर प्रोडक्शन कैपेसिटी' (spare production capacity) की भारी कमी है। ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि यह क्षमता अब सिर्फ सऊदी अरब (Saudi Arabia) और UAE के पास ही बची है। RBC की एनालिस्ट हेलिमा क्रॉफ्ट (Helima Croft) के अनुसार, OPEC+ देशों में केवल सऊदी अरब के पास ही पर्याप्त अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है।
यही नहीं, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) मार्केट भी गंभीर संकट का सामना कर रहा है। कतर, जो वैश्विक सप्लाई का करीब 20% हिस्सा सप्लाई करता है, वह भी अपना सारा LNG होर्मुज जलडमरूमध्य से ही भेजता है। इस रुकावट से यूरोप और एशिया के गैस आयातकों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यूरोप में नेचुरल गैस फ्यूचर्स (TTF) 20% से अधिक बढ़कर लगभग €39 प्रति MWh तक पहुंच गए हैं, जबकि यूरोपीय देशों का गैस स्टोरेज लेवल भी खतरनाक रूप से कम, यानी 31% पर आ गया है, जो पिछले साल इसी समय 40% था।
मार्केट की नाजुक हालत और आगे का रास्ता
मौजूदा ऊर्जा बाजार की हालत बेहद नाजुक है। 'स्पेयर कैपेसिटी' का कम होना और एक ही प्रमुख ट्रांजिट रूट (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर अत्यधिक निर्भरता इस संकट की जड़ है। OPEC+ की उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें भी सीमित हैं क्योंकि ज्यादातर सदस्य पहले से ही अधिकतम उत्पादन कर रहे हैं।
बाजार का मनोविज्ञान कीमतों को और बढ़ा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में $4-$10 प्रति बैरल का 'जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम' शामिल है। पिछले संकटों को देखें तो मध्य पूर्व में संघर्षों के कारण सप्लाई में वास्तविक कमी से कहीं ज़्यादा कीमतों में उछाल आया है।
भविष्य की ओर: अनिश्चितता का लंबा दौर
तेल और गैस की कीमतों का भविष्य पूरी तरह होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने की अवधि और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की रफ्तार पर निर्भर करेगा। अगर यह संकट लंबा चला और रास्ते बंद रहे, तो कीमतें $100 प्रति बैरल को आसानी से पार कर सकती हैं। कुछ अनुमानों के अनुसार, यह $140 तक भी जा सकती हैं।
वैश्विक इन्वेंटरी (inventories) का कम होना और सीमित स्ट्रेटेजिक रिजर्व (strategic reserves) इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। भले ही कुछ विश्लेषक इसे अस्थायी संकट मान रहे हों, लेकिन 'स्पेयर कैपेसिटी' की कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग की नाजुकता यह दर्शाती है कि किसी भी समाधान की बारीकी से निगरानी की जाएगी और अनिश्चितता का दौर लंबा खिंच सकता है।