शेयरों में गिरावट, कमोडिटी में बहार: क्या ये है निवेशकों के लिए 'सुरक्षा कवच'?

COMMODITIES
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AuthorMehul Desai|Published at:
शेयरों में गिरावट, कमोडिटी में बहार: क्या ये है निवेशकों के लिए 'सुरक्षा कवच'?
Overview

इस साल **कमोडिटी** (Commodities) बाजार में अच्छी चाल देखने को मिल रही है, जो अमेरिकी शेयरों में आ रही गिरावट के बीच निवेशकों के लिए एक सुरक्षा कवच (Hedge) की तरह काम कर रही है। यह ट्रेंड निवेशकों को अल्टरनेटिव एसेट्स जैसे **कमोडिटी ETFs** की ओर आकर्षित कर रहा है, जो ऐसे अस्थिर बाजार में रिस्क को मैनेज करने और पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने में मदद कर सकते हैं।

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ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले संकेतों और अमेरिकी शेयरों में आ रही नरमी के बीच, निवेशक अब कमोडिटी (Commodities) की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। यह ट्रेंड साफ तौर पर दिखा रहा है कि कैसे कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने और अस्थिरता से बचाने के लिए 'वैकल्पिक संपत्तियों' (Alternative Assets) की तलाश कर रहे हैं।

निवेशक क्यों ढूंढ रहे हैं विकल्प?

यह आम धारणा मजबूत हो रही है कि जब शेयर बाजार गिरता है, तो कमोडिटी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। जैसे-जैसे S&P 500 इंडेक्स में गिरावट आ रही है, निवेशक अपने पोर्टफोलियो में दूसरी संपत्तियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसके पीछे मुख्य विचार यह है कि कमोडिटी शेयरों की तुलना में अधिक स्थिर हो सकती है या विपरीत दिशा में चल सकती है, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिल सकती है।

कमोडिटी में दिख रही मिली-जुली मजबूती

हालांकि, कमोडिटी बाजार में कुल मिलाकर मजबूती दिख रही है, लेकिन अलग-अलग कमोडिटीज के प्रदर्शन में काफी भिन्नता है। ग्लोबल संघर्षों के कारण ऊर्जा की कीमतें, खासकर कच्चे तेल (Oil) की कीमत $100 प्रति बैरल के पार चली गई है। हालांकि, पर्याप्त सप्लाई और ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ते झुकाव से डिमांड ग्रोथ में कमी आने की आशंका के चलते कीमतों में और ज्यादा बढ़ोतरी सीमित हो सकती है। दूसरी ओर, कॉपर और एल्युमिनियम जैसे इंडस्ट्रियल मेटल्स को ग्रीन एनर्जी और निर्माण परियोजनाओं से मिल रही डिमांड का सहारा है, भले ही चीन के हाउसिंग मार्केट में नरमी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। गोल्ड और सिल्वर, ग्लोबल अनिश्चितता और बदलती इंटरेस्ट रेट नीतियों के बीच सुरक्षा चाहने वाले निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं, और हाल ही में इन्होंने ऑल-टाइम हाई लेवल को छुआ है। फार्म गुड्स (खेती-बाड़ी का सामान) भी सप्लाई में जोखिम और बदलती ग्लोबल डिमांड के कारण मजबूत बने हुए हैं। लेकिन, वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2025 और 2026 दोनों में ओवरऑल कमोडिटी प्राइसेस में 7% की गिरावट आ सकती है, जो लगातार चौथे साल गिरावट का संकेत होगा, हालांकि ये कीमतें प्री-पैंडेमिक स्तरों से ऊपर रहने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का अनुमान मिला-जुला है, कुछ का मानना ​​है कि ओवरऑल कमोडिटी इंडेक्स में मामूली गिरावट आएगी, लेकिन नेचुरल गैस और कीमती धातुओं (Precious Metals) जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन जारी रह सकता है।

शेयर बाजार पर मंडरा रहे खतरे

उधर, शेयर बाजार पर जोखिम मंडरा रहा है। S&P 500 का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 21.2 पर है, जो 5-साल के औसत 20.0 से थोड़ा ऊपर है। वहीं, शिलर PE (Shiller PE) 39.18 के स्तर पर है, जो मार्च 2026 की शुरुआत तक 28.95 तक भी पहुंचा था। यह बताता है कि शेयर महंगे हो सकते हैं और गिरावट के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। JPMorgan Chase & Co. ने चेतावनी दी है कि S&P 500 में 10% की करेक्शन (Correction) आ सकती है, जिसका कारण ग्लोबल अस्थिरता और ट्रेडर्स की तैयारी में कमी है। मार्केट सेंटिमेंट (Market Sentiment) सतर्क हो गया है, निवेशक बढ़ती एनर्जी प्राइसेस और अमेरिका के कमजोर जॉब डेटा से चिंतित हैं। यह स्टैगफ्लेशन (Stagflation) - यानी हाई इन्फ्लेशन और धीमी इकोनॉमिक ग्रोथ की स्थिति - को जन्म दे सकता है। हाल ही में S&P 500 और अमेरिकी क्रूड ऑयल (US Crude Oil) के बीच -0.813 का मजबूत इनवर्स कोरिलेशन (Inverse Correlation) देखा गया है। इसका मतलब है कि जब ग्लोबल घटनाओं के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो शेयर बाजार आमतौर पर गिरता है।

पोर्टफोलियो के लिए कमोडिटी कैसे बनीं 'हेज'

ऐतिहासिक रूप से, जब शेयर बाजार गिरता है, तब कमोडिटी अच्छा प्रदर्शन करती हैं। ऐसे सालों में जब इक्विटी (शेयरों) में 14% की गिरावट आई, तब कमोडिटी ने औसतन 6% का रिटर्न दिया। हालांकि, ये पैटर्न बदल सकते हैं, खासकर बड़े ग्लोबल झटकों के बाद। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य, जिसमें लगातार इन्फ्लेशन, ऊंची इंटरेस्ट रेट और ग्लोबल तनाव शामिल हैं, काफी जटिल है। सेंट्रल बैंक इन्फ्लेशन को कंट्रोल करने और इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करने के बीच संतुलन बना रहे हैं, जिससे भविष्य की इंटरेस्ट रेट नीतियों के बारे में अनिश्चितता पैदा हो रही है। ऐसे माहौल में, कमोडिटी एक आकर्षक डाइवर्सिफायर (Diversifier) साबित हो सकती है। लेकिन, बड़े उतार-चढ़ाव के दौरान शेयर बाजार की भावनाओं से उनका बढ़ता जुड़ाव जोखिम का एक नया स्तर जोड़ता है। कमोडिटी का प्रदर्शन सीधे तौर पर इंटरेस्ट रेट, इन्फ्लेशन और ग्लोबल घटनाओं जैसे आर्थिक कारकों से जुड़ा होता है। जब तक इंटरेस्ट रेट ऊंची बनी रहती हैं और ग्लोबल जोखिम जारी रहते हैं, कमोडिटी एक हेज (Hedge) का विकल्प दे सकती हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता विशिष्ट कमोडिटी और बाजार के झटके के प्रकार के आधार पर बहुत भिन्न हो सकती है।

क्यों कुछ एनालिस्ट्स को कीमतों में गिरावट की उम्मीद?

आम मजबूती के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स को कमोडिटी प्राइसेस में लगातार दबाव की उम्मीद है। वर्ल्ड बैंक 2026 के लिए कमोडिटी प्राइसेस में मामूली गिरावट का अनुमान लगा रहा है, जिसका कारण कमजोर इंडस्ट्रियल डिमांड और पर्याप्त सप्लाई है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स (Oxford Economics) 2026 के लिए कमोडिटी प्राइसेस में 0.9% की गिरावट की भविष्यवाणी करता है, और उनका मानना ​​है कि इकोनॉमिक और इंडस्ट्रियल ग्रोथ उम्मीद से धीमी रहेगी। तेल और गैस क्षेत्र, हाल की कीमतों में उछाल के बावजूद, अत्यधिक सप्लाई और धीमी डिमांड ग्रोथ वाले बाजार का सामना कर रहा है। 2026 में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की औसत कीमत $56-$62 प्रति बैरल रहने का अनुमान है। इसके अलावा, संकट के दौरान कमोडिटी और शेयर बाजारों के बीच बढ़ता संबंध, उनके पारंपरिक डाइवर्सिफायर के लाभ को कम कर सकता है। एक लंबा अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, घरेलू आर्थिक चिंताओं के साथ मिलकर, स्टैगफ्लेशन को जन्म दे सकता है, जो शेयर और कुछ कमोडिटी दोनों के लिए बुरा है। S&P 500 में हाई P/E रेश्यो यह भी संकेत देता है कि शेयर में तेज गिरावट आ सकती है, जो उम्मीद से ज्यादा कमोडिटी डिमांड को प्रभावित कर सकती है।

आउटलुक: कमोडिटी बाजार में बनी रहेगी वोलेटिलिटी

आगे देखते हुए, कमोडिटी बाजार में उथल-पुथल (Volatility) बने रहने की संभावना है। ग्लोबल राजनीतिक हालात, सेंट्रल बैंक की इंटरेस्ट रेट नीतियां और ग्रीन एनर्जी की ओर निरंतर बदलाव सभी इसमें भूमिका निभाएंगे। भले ही एनालिस्ट्स ओवरऑल कमोडिटी प्राइसेस के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन कीमती धातुओं (Precious Metals) और ग्रीन टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले कुछ इंडस्ट्रियल मेटल्स जैसे खास क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन की संभावना है। कमोडिटी में इन्वेस्टमेंट करने से पोर्टफोलियो मजबूत हो सकता है, लेकिन निवेशकों को विभिन्न एसेट क्लास के बीच जटिल संबंधों के बारे में पता होना चाहिए। आर्थिक चुनौतियां 2026 के दौरान बाजार के रुझानों को भी बदल सकती हैं।

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