सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। पिछले एक साल में इन बॉन्ड्स पर **34%** से लेकर **44%** तक का रिटर्न मिला है, जबकि सोने की कीमतों में हाल ही में नरमी आई थी। सरकार ने नए SGB जारी करना भले ही बंद कर दिया हो, लेकिन मौजूदा बॉन्ड्स अभी भी एक्सचेंजों पर ट्रेड हो रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान देना होगा कि बजट 2026 के बदलावों के बाद, कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) में छूट केवल उन्हीं मूल सब्सक्राइबर्स को मिलेगी जो बॉन्ड को पूरी 8 साल की मैच्योरिटी तक रखते हैं।
एसजीबी (SGB) निवेशकों की चमकी किस्मत
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) रखने वाले निवेशकों के लिए पिछले 12 महीने शानदार रहे हैं। हालिया एक्सचेंज डेटा के अनुसार, इन निवेशकों को 34% से लेकर 44% तक का जबरदस्त रिटर्न मिला है। यह प्रदर्शन तब भी कायम है जब फिजिकल गोल्ड की कीमतों में कुछ नरमी आई है।
हालांकि भारतीय सरकार ने इन बॉन्ड्स की नई इश्यू (Issue) बंद कर दी है, फिर भी NSE और BSE पर करीब 45 अलग-अलग सीरीज के बॉन्ड्स सक्रिय रूप से ट्रेड हो रहे हैं। ये बॉन्ड्स निवेशकों को 2.50% का फिक्स्ड एनुअल इंटरेस्ट (Fixed Annual Interest) देते हैं और मैच्योरिटी पर उस समय सोने की मौजूदा बाजार कीमत पर रिडीम (Redeem) किए जाते हैं।
बजट 2026 का सेकेंडरी मार्केट खरीदारों पर असर
बजट 2026 में किए गए एक अहम बदलाव ने SGB निवेशकों के लिए टैक्स के नियमों को बदल दिया है। पहले, मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री (Tax-Free) होने का फायदा काफी व्यापक था। लेकिन अब, सरकार ने इस छूट को केवल उन्हीं मूल सब्सक्राइबर्स (Original Subscribers) के लिए सीमित कर दिया है जिन्होंने सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से बॉन्ड खरीदे थे और उन्हें पूरी 8 साल की मैच्योरिटी तक रखा है।
जो निवेशक सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीद रहे हैं, उन्हें रिडेम्पशन (Redemption) पर अब कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) देना होगा। इस बदलाव का मकसद सरकार की बढ़ती कर्ज देनदारियों (Debt Obligations) को नियंत्रित करना और SGBs को सट्टेबाजी वाले ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट (Speculative Trading Instrument) के तौर पर इस्तेमाल होने से रोकना है।
सरकारी कर्ज की स्थिति
SGBs से जुड़ी सरकार की कुल बकाया देनदारी काफी बड़ी है, जिसका अनुमान ₹1.12 लाख करोड़ से ₹1.20 लाख करोड़ के बीच है। यह राशि 2015 के अंत में स्कीम शुरू होने के समय से काफी ज्यादा है। तब सोने का भाव करीब ₹25,000 प्रति 10 ग्राम था, जबकि मौजूदा कीमतें लगभग ₹1.29 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई हैं। सोने की कीमतों में उछाल के साथ ही मैच्योरिटी पर इन बॉन्ड्स को रिडीम करने की सरकारी लागत भी बढ़ी है।
मौजूदा बॉन्ड्स का मार्केट परफॉर्मेंस
हालिया ट्रेडिंग इन इंस्ट्रूमेंट्स (Instruments) की मजबूती को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, फरवरी 2032 में मैच्योर होने वाले बॉन्ड का भाव हाल ही में ₹14,537 प्रति ग्राम पर बंद हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 34% की बढ़ोतरी दिखाता है। अगस्त 2028 में मैच्योर होने वाली एक अन्य सीरीज का भाव ₹14,093 पर बंद हुआ।
हालांकि ये बॉन्ड्स सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के साथ-साथ फिक्स्ड इंटरेस्ट इनकम (Fixed Interest Income) का जरिया देते हैं, लेकिन ये मार्केट की अस्थिरता (Volatility) से अछूते नहीं हैं।
जो निवेशक सेकेंडरी मार्केट पर SGBs खरीदने पर विचार कर रहे हैं, उन्हें नए टैक्स नियमों को ध्यान से देखना चाहिए, क्योंकि कैपिटल गेन छूट की कमी मूल सब्सक्राइबर्स की तुलना में मैच्योरिटी पर नेट रिटर्न (Net Return) को काफी प्रभावित कर सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अगले कुछ सालों में जैसे-जैसे ये बॉन्ड्स अपनी मैच्योरिटी डेट के करीब आते हैं, वैसे-वैसे बकाया कर्ज का प्रबंधन कैसे किया जाता है।
