Sovereign Gold Bonds: निवेशकों को **210%** से ज्यादा का बंपर रिटर्न, पर टैक्स के नए नियम से मचा हड़कंप!

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Sovereign Gold Bonds: निवेशकों को **210%** से ज्यादा का बंपर रिटर्न, पर टैक्स के नए नियम से मचा हड़कंप!
Overview

Sovereign Gold Bond (SGB) 2020-21 Series-VIII के निवेशकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। यह बॉन्ड सीरीज **18 मई 2026** को मैच्योर हो रही है और निवेशकों को **210%** से भी ज्यादा का कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital Appreciation) दे रही है। लेकिन, **1 अप्रैल 2026** से लागू हो रहे नए टैक्स नियमों के चलते निवेशकों के लिए यह बड़ी खबर एक झटका भी साबित हो सकती है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

SGB निवेशकों की चांदी, पर टैक्स के नए नियम से चिंता बढ़ी

Sovereign Gold Bond (SGB) 2020-21 Series-VIII के निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। 18 मई 2026 को इस बॉन्ड सीरीज की मैच्योरिटी हो रही है, और निवेशक 210% से अधिक के शानदार कैपिटल गेन्स (Capital Gains) का मजा लेंगे। बॉन्ड का रिडेम्पशन प्राइस (Redemption Price) ₹16,012 प्रति यूनिट तय किया गया है, जो नवंबर 2020 में इश्यू प्राइस (Issue Price) ₹5,127 प्रति ग्राम (ऑनलाइन सब्सक्राइबर्स के लिए) और ₹5,177 प्रति ग्राम (ऑफलाइन सब्सक्राइबर्स के लिए) से काफी ज्यादा है। यानी, करीब साढ़े पांच साल में निवेशकों ने मोटा मुनाफा कमाया है। यह रिटर्न 2.5% के सालाना ब्याज को छोड़कर है, जो बॉन्ड पर मिलता है।

सोने की कीमतों में उछाल बना बड़ी वजह

दरअसल, पिछले पांच सालों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई है। नवंबर 2020 में जहां सोना लगभग ₹4,480 से ₹5,177 प्रति ग्राम के दायरे में था, वहीं 18 मई 2026 तक यह ₹15,693 प्रति ग्राम के करीब पहुंच चुका है। सोने की कीमतों में इस उछाल और SGB पर मिलने वाले 2.5% के सालाना ब्याज ने इसे फिजिकल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से कहीं बेहतर निवेश विकल्प बना दिया था। SGB स्कीम को भारत में सोने के इम्पोर्ट को कम करने के लिए लॉन्च किया गया था।

टैक्स के नियमों में बदलाव, निवेशकों के लिए सिरदर्द

हालांकि, नई टैक्स व्यवस्था, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी, निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव लाएगी। अब तक, मैच्योरिटी पर SGBs पर होने वाले कैपिटल गेन्स पर सभी निवेशकों को टैक्स छूट मिलती थी, चाहे उन्होंने बॉन्ड सीधे RBI से खरीदे हों या सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market) से। लेकिन नए नियमों के तहत, यह टैक्स एग्जम्पशन (Tax Exemption) केवल उन ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स (Original Subscribers) को मिलेगा जो बॉन्ड को पूरी 8 साल की अवधि तक होल्ड करेंगे। जो निवेशक स्टॉक एक्सचेंज से SGBs खरीदेंगे, उन्हें अब कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा। यानी, 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (इंडेक्सेशन के बिना) या फिर उनकी लागू इनकम टैक्स स्लैब दरें (Short-term Gains के लिए) लगेंगी। इस बदलाव से कई निवेशकों के लिए SGBs, खासकर सेकेंडरी मार्केट से खरीदने वालों के लिए, कम आकर्षक हो गए हैं।

सोना अभी भी मजबूत, पर SGB की टैक्स बढ़त कम

टैक्स नियमों में बदलाव के बावजूद, सोना 2026 तक एक सुरक्षित निवेश (Safe-haven Asset) और महंगाई से बचाव (Inflation Hedge) के तौर पर आकर्षक बना रहेगा। भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी और करेंसी की चाल जैसी चीजें सोने की कीमतों को सहारा दे सकती हैं। ऐसे में, SGBs अभी भी सरकारी गारंटी और ब्याज दर के साथ सोने में निवेश का एक अच्छा तरीका हैं, लेकिन अब उनकी टैक्स-कुशलता (Tax-efficient Status) पहले जैसी नहीं रही। निवेशकों को अब सीधे खरीदने या सेकेंडरी मार्केट से खरीदने के दौरान टैक्स के नतीजों को ध्यान में रखना होगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.