Sovereign Gold Bonds (SGB) के निवेशकों के लिए शानदार खबर है! 2020-21 Series X के बॉन्ड होल्डर्स अब अपने यूनिट्स को ₹14,158 प्रति यूनिट पर रिडीम (redeem) कर सकते हैं। यह निवेशकों के लिए मूल कीमत से लगभग **177%** का भारी मुनाफा है।
कैसे मिला निवेशकों को इतना बड़ा मुनाफा?
यह बंपर रिटर्न सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी के कारण संभव हुआ है। इसके अलावा, बॉन्ड पर निवेशकों को पहले से ही 2.5% का सालाना ब्याज भी मिल रहा था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने हालिया औसत सोने की क्लोजिंग प्राइस के आधार पर रिडेम्पशन प्राइस ₹14,158 प्रति यूनिट तय किया है। यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्होंने बॉन्ड ₹5,104 प्रति ग्राम के इश्यू प्राइस पर खरीदे थे।
रिडेम्पशन प्राइस कैसे तय होता है?
RBI रिडेम्पशन वैल्यू तय करने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करता है। इसके तहत, बॉन्ड की अवधि पूरी होने से ठीक पहले के तीन बिजनेस दिनों में इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की क्लोजिंग प्राइस का औसत लिया जाता है। इस बार के लिए, जुलाई 15, 16 और 17, 2026 के गोल्ड प्राइसेज का इस्तेमाल करके यह वैल्यूएशन किया गया है।
कैपिटल गेन के अलावा भी मिले फायदे
बाजार की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के अलावा, Sovereign Gold Bond स्कीम में एक और खास फायदा शामिल था। निवेशकों को उनके शुरुआती निवेश पर 2.5% का फिक्स्ड सालाना ब्याज मिलता था, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाता था। खास बात यह है कि अगर किसी निवेशक ने ऑनलाइन अप्लाई किया था और डिजिटल पेमेंट की थी, तो उनका एंट्री प्राइस ₹5,054 प्रति ग्राम था, जिससे उनका कुल मुनाफा लगभग 180% तक पहुँच गया। यह ब्याज कैपिटल एप्रिसिएशन (capital appreciation) से बिल्कुल अलग था और होल्डिंग पीरियड के दौरान एक रेगुलर इनकम का जरिया बना रहा।
सोने की कीमतों पर असर डालने वाले फैक्टर्स
यह बड़ा रिटर्न दिखाता है कि पिछले कुछ सालों में भारत में सोने ने एक एसेट क्लास (asset class) के तौर पर कितनी मजबूत परफॉर्मेंस दिखाई है। निवेशक अक्सर महंगाई और करेंसी में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए सोने में निवेश करते हैं। रिडेम्पशन वैल्यू में यह बढ़ोतरी घरेलू सोने की कीमतों में आई व्यापक वृद्धि को दर्शाती है, जो 2020-21 की अवधि से लगातार बढ़ रही हैं। SGB के दूसरे ट्रान्शे (tranches) के होल्डर्स भी मौजूदा सोने के भाव पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि रिडेम्पशन प्राइस हमेशा बुलियन (bullion) के मौजूदा बाजार भाव से जुड़ा होता है, न कि मूल इश्यू प्राइस से। बॉन्ड होल्डर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि वे अपने बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के जरिए समय से पहले इन निवेशों से बाहर निकलकर इनগুলোর को लॉक कर सकते हैं।
