कैपिटल गेन्स का बड़ा मौका
Sovereign Gold Bond (SGB) 2021-22 Series-III के लिए पांच साल की रिडेम्पशन विंडो खुल गई है। इससे निवेशकों को 220.56% तक के जबरदस्त रिटर्न का मौका मिला है। RBI ने रिडेम्पशन प्राइस ₹15,512 प्रति ग्राम तय किया है। यह एक बड़ी रकम है, खासकर 2021 में जारी कीमत के मुकाबले। अब सवाल यह है कि क्या निवेशकों को यह पैसा निकाल लेना चाहिए या बॉन्ड को 8 साल की मैच्योरिटी तक होल्ड करना चाहिए। यह फैसला निवेशक की टैक्स देनदारी और पोर्टफोलियो को री-बैलेंस करने की जरूरत पर निर्भर करेगा।
महंगाई से सुरक्षा और परफॉरमेंस
इस 220% रिटर्न की तुलना पारंपरिक फिक्स्ड इनकम सेट्स से करें तो यह कहीं बेहतर है। जहां बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट्स ने 2021-2026 के दौरान सालाना 5-6% का रिटर्न दिया, वहीं SGB ने एक अनोखा डबल फायदा दिया - सॉवरेन गारंटी के साथ कीमत में बढ़ोतरी और 2.5% का सालाना इंटरेस्ट। फिजिकल गोल्ड के विपरीत, जिसमें स्टोरेज और मेकिंग चार्जेज लगते हैं, SGB सिर्फ प्राइस ट्रैकिंग का काम करता है। हालांकि, मौजूदा ग्लोबल इकोनॉमी को भी ध्यान में रखना होगा। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में, अगर रियल इंटरेस्ट रेट्स स्थिर होते हैं या बढ़ते हैं, तो सोने की कीमतों में तेजी धीमी पड़ सकती है।
अवसर लागत का नुकसान?
पांच साल बाद बॉन्ड को होल्ड करने में कुछ स्ट्रक्चरल रिस्क हैं। सबसे बड़ी चिंता लिक्विडिटी और टैक्स ट्रीटमेंट की है। मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में छूट मिलती है। लेकिन 5 साल बाद रिडीम करने पर सॉवरेन इंटरेस्ट पेमेंट बंद हो जाता है। निवेशकों को इन आखिरी तीन सालों के 2.5% इंटरेस्ट के नुकसान और उस पैसे को इक्विटी या दूसरे हाई-यील्ड इंस्ट्रूमेंट्स में लगाने के फायदे को तौलना होगा। अगर मार्केट में वोलेटिलिटी कम होती है, तो सोना शायद उतना अच्छा परफॉर्म न करे। इसके अलावा, सेंट्रल बैंकों की गोल्ड बाइंग पॉलिसी में बदलाव सोने की कीमत को प्रभावित कर सकता है।
आगे की रणनीति
फाइनेंशियल एडवाइजर्स का मानना है कि जो निवेशक सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए अगले तीन साल बॉन्ड को होल्ड करना एक अच्छा विकल्प है ताकि टैक्स-फ्री टोटल रिटर्न का फायदा उठाया जा सके। वहीं, जिन्हें लिक्विडिटी की जरूरत है, उनके लिए ₹15,512 प्रति ग्राम का वैल्यूएशन प्रॉफिट बुक करने का अच्छा पॉइंट हो सकता है। यह फैसला 220% के आंकड़े से भावुक हुए बिना, निवेशक की भविष्य की एसेट एलोकेशन की जरूरत के हिसाब से लिया जाना चाहिए।
