अनुभव दयाल की कंपनी Soach Global ने 'Virtual Food Grain Asset' (VFGA) मॉडल पेश किया है। SEBI के आइडियाथॉन में सराहे गए इस कॉन्सेप्ट का मकसद फसलों की पैदावार को डिजिटल टोकन में बदलना है, ताकि इन्हें डीमैट अकाउंट के जरिए ट्रेड किया जा सके।
अनुभव दयाल द्वारा तैयार किया गया यह VFGA (Virtual Food Grain Asset) मॉडल अब चर्चा में है। SEBI के 'मंथन आइडियाथॉन' में पहचान मिलने के बाद, यह प्रस्ताव कृषि कमोडिटी के फाइनेंसिंग और ट्रेडिंग के तरीके को बदलने की उम्मीद जगाता है।
कैसे काम करेगा यह मॉडल?
इस नए कॉन्सेप्ट के तहत किसान या प्रोड्यूसर कंपनियां अपनी भविष्य की फसल के बदले डिजिटल यूनिट जारी कर सकेंगी। इन्हें डीमैट खातों में रखा जा सकेगा, जिससे फसल कटाई से पहले ही प्राइस डिस्कवरी और फाइनेंशियल प्लानिंग आसान हो जाएगी। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मैच्योरिटी पर फिजिकल डिलीवरी अनिवार्य होगी, यानी डिजिटल टोकन होल्डर को अंत में फसल लेनी होगी।
पारदर्शिता के लिए क्या है प्लान?
क्वालिटी और भरोसे को सुनिश्चित करने के लिए इसमें मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन का प्रस्ताव है, जिसमें मिट्टी की जांच, स्टैंडर्ड इनपुट्स और ग्राम पंचायतों की निगरानी शामिल होगी। इसका उद्देश्य डेटा का एक ऐसा ढांचा बनाना है जिस पर इन्वेस्टर्स भरोसा कर सकें।
निवेशकों के लिए चेतावनी
सावधान रहें, यह अभी केवल एक शुरुआती कॉन्सेप्ट है। Soach Global कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है और न ही इसका कोई स्टॉक मार्केट में उपलब्ध है। यह एक एग्रीकल्चर इनोवेशन का विचार है, न कि कोई ट्रेडेबल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट। फिलहाल कोई भी पायलट प्रोजेक्ट या लाइव ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म इस सिस्टम पर काम नहीं कर रहा है।
इसके लागू होने में अभी लंबा समय है। एक्सचेंज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाना और लॉजिस्टिक चुनौतियों (जैसे फसल की क्वालिटी मानकीकरण) को पार करना इस मॉडल की सफलता के लिए सबसे बड़ी बाधाएं होंगी।
