क्यों आई चांदी की चाल में नरमी?
27 फरवरी 2026 तक, COMEX Silver फ्यूचर्स $90.18 प्रति ट्रॉय औंस के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। यह कीमतें जनवरी में देखे गए $121.67 के ऑल-टाइम हाई (all-time high) से कुछ कम हैं। भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, चांदी फ्यूचर्स ₹2,59,669 और ₹2,66,000 प्रति किलोग्राम के बीच उतार-चढ़ाव दिखा रहे हैं। सोने की कीमतें लगभग ₹160,375 पर स्थिर हैं। गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो (Gold-to-silver ratio) 75:1 और 85:1 के बीच बना हुआ है, जो ऐतिहासिक औसत से ऊपर है। इसका मतलब है कि चांदी अभी भी सोने की तुलना में थोड़ी अंडरवैल्यूड (undervalued) हो सकती है, जो निवेशकों के लिए एक संकेत है। COMEX Silver फ्यूचर्स पर ट्रेडिंग वॉल्यूम लगभग 8.99K कॉन्ट्रैक्ट्स और MCX पर 5,700 कॉन्ट्रैक्ट्स है, जो सक्रिय लेकिन सतर्क ट्रेडिंग का संकेत देता है।
मजबूत डिमांड के बावजूद ये हैं चिंताएं
चांदी की मांग कई सालों से सप्लाई की कमी और इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण मजबूत बनी हुई है। खास तौर पर सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और AI-ड्रिवेन डेटा सेंटर्स जैसे सेक्टर्स में इसकी जरूरत बढ़ी है। भारत, जो चांदी का एक बड़ा उपभोक्ता और निवेशक है, में आर्थिक रिकवरी (economic recovery) के कारण इसकी मांग और बढ़ी है। अक्टूबर 2025 में ही भारत का इंपोर्ट (import) 44% साल-दर-साल बढ़ा था। यह मजबूत डिमांड ऐसे समय में आ रही है जब माइन सप्लाई (mine supply) सीमित है और वैश्विक फ्लो (global flows) टाइट हो रहे हैं, जिससे लंदन वॉल्ट्स (London vaults) में इन्वेंटरी (inventory) कम हो गई है और लीज रेट्स (lease rates) बढ़ गए हैं।
हालांकि, इन मजबूत फंडामेंटल (fundamental) के सामने कुछ बड़े मैक्रो इकोनॉमिक हेडविंड्स (macroeconomic headwinds) भी हैं। अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना, जिसका चांदी की कीमतों से उल्टा संबंध होता है, इसके ऊपर जाने के मोमेंटम (momentum) को सीधा खतरा पहुंचाता है। भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) भी अस्थिरता पैदा कर रहे हैं, जो करेंसी में उतार-चढ़ाव से और बढ़ सकती है।
क्यों हो सकती है कीमतों में गिरावट?
सप्लाई की कमी और इंडस्ट्रियल डिमांड भले ही चांदी के लिए एक आधार (floor) तैयार कर रही हों, लेकिन 2025 में देखी गई आक्रामक बढ़त, जिसमें 147% की तेजी बताई गई है, प्रॉफिट-टेकिंग (profit-taking) के बड़े रिस्क को न्योता देती है। जनवरी के हाई (high) से मेटल का पीछे हटना इस बात का प्रमाण है कि बाजार ऐसे एक्शन के प्रति कितना संवेदनशील है। अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए चांदी को महंगा बना रही है, जिससे डिमांड कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव आ सकता है। यदि वैश्विक आर्थिक रिकवरी धीमी पड़ती है या ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इंडस्ट्रियल सेक्टर्स की डिमांड धीमी पड़ सकती है, जिससे सप्लाई डेफिसिट (supply deficit) की कहानी पर सवाल उठेंगे। इसके अलावा, सोने की तुलना में चांदी की वोलैटिलिटी (volatility) अधिक होने के कारण, सेंटीमेंट (sentiment) बदलने पर यह शार्प करेक्शन (sharp correction) के प्रति अधिक संवेदनशील है, खासकर अगर रैली के दौरान बने स्पेकुलेटिव पोजीशन (speculative positions) तेजी से अनवाइंड (unwind) होने लगें।
एनालिस्ट्स का क्या है अनुमान?
एनालिस्ट्स (Analysts) 2026 के लिए चांदी की कीमतों को लेकर मिले-जुले अनुमान लगा रहे हैं। जे.पी. मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च (J.P. Morgan Global Research) ने औसतन $81 प्रति औंस का अनुमान लगाया है, कुछ $100 या उससे अधिक की संभावना भी देख रहे हैं। बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) का अनुमान $56 का है, जो $65 तक जा सकता है। गोल्डसिल्वर.कॉम (GoldSilver.com) के एनालिस्ट्स का अनुमान काफी बुलिश (bullish) है, वे कीमतों को $100 से ऊपर और संभावित रूप से $175+ तक जाते देख रहे हैं। ये अनुमान AI और ग्रीन एनर्जी से लगातार इंडस्ट्रियल डिमांड, अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) की दिशा और अमेरिकी डॉलर की मजबूती जैसे कारकों पर निर्भर करते हैं। टेक्निकली (Technically), COMEX Silver के लिए $70-$75 और $84-$87 के जोन सपोर्ट (support) के तौर पर देखे जा रहे हैं, जबकि $92-$96 और $100-$105 के जोन रेजिस्टेंस (resistance) लेवल हैं। इन सपोर्ट लेवल से ऊपर बने रहना कीमतों में फिर से तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण होगा, जबकि इन्हें तोड़ना छोटी अवधि के दबाव को बढ़ा सकता है।